Saturday, 29 August 2026

रामगढ़ बांध में कृत्रिम वर्षा का सफल प्रयोग, AI तकनीक और स्वदेशी ड्रोन से मिली सफलता


रामगढ़ बांध में कृत्रिम वर्षा का सफल प्रयोग, AI तकनीक और स्वदेशी ड्रोन से मिली सफलता

जयपुर। राजस्थान में पानी की किल्लत से निपटने के लिए किए जा रहे प्रयासों में सोमवार, 1 सितंबर को रामगढ़ बांध में कृत्रिम बारिश कराने का प्रयोग सफल रहा। एक्सेल-1 कंपनी ने हाइड्रोट्रेस प्लेटफॉर्म और स्वदेशी ड्रोन की मदद से तीसरे प्रयास में यह सफलता हासिल की। इस बार बांध क्षेत्र में 0.8 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि इससे पहले 12 और 18 अगस्त को किए गए प्रयास विफल रहे थे।

AI-संचालित तकनीक से बढ़ी उम्मीदें: इस प्रयोग में AI-संचालित तकनीक का इस्तेमाल किया गया, जिससे क्लाउड माइक्रो फिजिक्स में सुधार हुआ। क्लाउड सीडिंग प्रक्रिया के तहत सिल्वर आयोडाइड, सोडियम क्लोराइड और ड्राई आइस जैसे रसायन बादलों में छोड़े जाते हैं, जो पानी की सूक्ष्म बूंदों को आकर्षित कर उन्हें भारी बनाते हैं और फिर बारिश होती है। हालांकि, इस प्रक्रिया के लिए बादलों में पर्याप्त नमी का होना अनिवार्य है।

कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने बताई बड़ी उपलब्धि: कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने इसे राजस्थान के जल प्रबंधन में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि करार दिया। उन्होंने कहा कि यह प्रयोग मेक इन इंडिया नवाचार का उदाहरण है और भारत की जलवायु सहनशीलता एवं आत्मनिर्भरता में योगदान करेगा।

हालांकि कंपनी ने अपनी सफलता 0.8 मिमी बारिश के रूप में दर्ज की, लेकिन जयपुर शहर और ग्रामीण इलाकों में एक इंच तक बारिश हुई। ऐसे में स्थानीय लोगों ने सवाल उठाए कि कंपनी अपनी उपलब्धि को सीमित आंकड़ों में दिखा रही है, जबकि वास्तविक प्रभाव कहीं अधिक रहा।

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