



जयपुर। विश्व प्रसिद्ध ज्योतिष एवं वास्तु शास्त्री गणेश शंकर ने आगामी 7 सितम्बर 2025 (रविवार) को होने वाले चंद्र ग्रहण को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि ग्रहण का सूतक काल दोपहर 2:00 बजे से प्रारंभ हो जाएगा, जबकि ग्रहण रात्रि 10:00 बजे से शुरू होकर रात्रि 1:30 बजे तक चलेगा। इसी समय शुद्धिकाल माना जाएगा।
गणेश शंकर ने कहा कि सूतक काल से ही प्रार्थना, साधना और जप-ध्यान करना श्रेष्ठ कार्य है। इस अवधि में कुछ नियमों का पालन विशेष रूप से करना चाहिए:
भोजन निषेध – बूढ़े, रोगी और छोटे बच्चों को छोड़कर किसी को भी भोजन नहीं करना चाहिए।
जल का सेवन – यदि आवश्यकता हो तो केवल तुलसी दल या कुशा (ढाब) युक्त जल का ही सेवन करें।
स्त्री सहवास – इस अवधि में पूर्णतः वर्जित है।
मंदिर और पूजा स्थल – ग्रहण काल में मंदिरों के कपाट बंद रहते हैं और शुद्धिकरण के बाद ही पुनः पूजा-अर्चना होती है।
वास्तु शास्त्री गणेश शंकर का कहना है कि ग्रहण काल में किए गए जप, ध्यान और दान का फल सामान्य समय से कई गुना अधिक मिलता है। इसी कारण से शास्त्रों में इसे अत्यंत शुभ माना गया है।