सीकर/रैवासा धाम। योग गुरु बाबा रामदेव ने सीकर जिले के रैवासा धाम में चल रहे 9 दिवसीय ‘सियपिय मिलन महोत्सव’ में शिरकत करते हुए दान, संस्कार और जीवनशैली पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि मुसलमान समुदाय में हर कमाई से 6% हिस्सा जकात के रूप में मस्जिद और मदरसों को दिया जाता है। “हम लोग 1% भी दान करने में कतराते हैं और कहते हैं कि हम तो पहले ही गरीब हैं। शास्त्रों में लिखा है कि जो दान नहीं करते वे गरीब ही रह जाते हैं और अमीर लोग भी अगर दान नहीं करेंगे तो गरीब हो जाएंगे।”
बचपन की यादें और संस्कार: बाबा रामदेव ने अपने बचपन को याद करते हुए कहा कि “हमें बचपन में 10 पैसे में टॉफी और दीपावली पर 2 रुपए मिलते थे, लेकिन घर में पहली रोटी हमेशा गाय के लिए बनती थी। हमें भले ही पैसे न मिले हों, लेकिन अच्छे संस्कार जरूर मिले हैं।” उन्होंने बताया कि उनकी मां मंदिर में दान देने के लिए उन्हें एक-दो रुपए देकर भेजती थीं।
60 के बाद जीवन का असली आनंद: बाबा रामदेव ने अपनी दिनचर्या साझा करते हुए कहा कि उनका दिन सुबह 3 बजे शुरू होता है। वे रोज रनिंग और ध्यान करते हैं। उन्होंने साधु-संतों और महात्माओं से अपील की कि वे कम से कम 80 साल तक दौड़ते-भागते रहें। बाबा रामदेव ने कहा कि “लोग 60 साल के बाद खुद को बुजुर्ग मानने लगते हैं, जबकि 60 के बाद तो ठाठ से जीने का असली आनंद आता है। जब मैं 100 साल का हो जाऊंगा तब भी जीवन को आगे बढ़ाऊंगा।”
श्रद्धालुओं से मारवाड़ी में संवाद: रामदेव ने कार्यक्रम में श्रद्धालुओं से मारवाड़ी भाषा में संवाद किया और भजन भी गाए। उनकी बातों से सभा स्थल पर मौजूद लोगों ने खूब उत्साह दिखाया।