



अजमेर: स्थायी लोक अदालत, अजमेर ने भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) को सेवा में कमी का दोषी मानते हुए 25 लाख रुपये का बीमा क्लेम और 10,000 रुपये मानसिक व आर्थिक क्षतिपूर्ति के रूप में अदा करने का आदेश दिया है।
यह मामला रामगंज अजमेर निवासी शशांक सिंघल द्वारा दायर किया गया था, जिसने अपनी दिवंगत मां निधि सिंघल की बीमा पॉलिसी पर दावा किया था। निधि सिंघल ने 28 मई 2021 को भारतीय जीवन बीमा निगम से 25 लाख की जीवन बीमा पॉलिसी ली थी। 24 जुलाई 2023 को उनकी मृत्यु पीलिया (लिवर संबंधित बीमारी) से हुई थी। बीमा क्लेम दाखिल करने पर एलआईसी ने 30 अक्टूबर 2023 को यह कहते हुए क्लेम खारिज कर दिया कि निधि सिंघल ने बीमा फॉर्म में पूर्व में हुए यूटरस रिमूवल ऑपरेशन (जून 2020) की जानकारी नहीं दी थी, जो कि एक महत्पूर्ण चिकित्सीय तथ्य था।
शिकायतकर्ता के अधिवक्ता अमित गांधी ने अदालत के समक्ष तर्क दिया कि बीमा धारक की मृत्यु लिवर की बीमारी से हुई थी, जिसका यूटरस ऑपरेशन से कोई संबंध नहीं था और यह तर्क जानबूझकर तथ्य छुपाने के आरोप को खारिज करता है।
स्थायी लोक अदालत ने एलआईसी को सेवा में कमी का दोषी मानते हुए, बीमा राशि 25 लाख रुपये के साथ ब्याज सहित तथा 10,000 रुपये मानसिक व आर्थिक क्षतिपूर्ति के रूप में अदा करने का आदेश पारित किया।