



राजस्थान विश्वविद्यालय सहित प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव की बहाली को लेकर छात्रों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। गुरुवार को राजस्थान विश्वविद्यालय में छात्र नेता नीरज खीचड़ के नेतृत्व में छात्रों ने विवि के मुख्य द्वार पर सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन कर रहे छात्रों को जब कैंपस में घुसने से रोका गया तो पुलिस को उन्हें खदेड़ना पड़ा।
छात्रों का कहना है कि नई शिक्षा नीति (NEP-2020) के तहत सेमेस्टर प्रणाली लागू होने से पहले ही साल में दो बार परीक्षाएं होती हैं। ऐसे में छात्रसंघ चुनावों से न केवल पढ़ाई बाधित होगी, बल्कि शैक्षणिक सत्रों में भी देरी हो सकती है।
इस मुद्दे पर डिप्टी सीएम डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि फिलहाल सरकार की प्राथमिकता युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और रोजगार उपलब्ध कराना है, न कि चुनाव कराना।
उधर, ऑल राजस्थान छात्रसंघ चुनाव संघर्ष समिति के छात्र नेताओं ने गुरुवार को पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मुलाकात की। छात्र राजनीति से निकले गहलोत ने छात्रसंघ चुनावों की बहाली का समर्थन किया। उन्होंने याद दिलाया कि 2003-2008 की भाजपा सरकार ने चुनाव रोक दिए थे, जिन्हें 2010 में कांग्रेस सरकार ने दोबारा शुरू किया था।
गहलोत ने यह भी कहा कि कोविड-19 के चलते वर्ष 2020 में चुनाव स्थगित किए गए थे, लेकिन कांग्रेस सरकार ने 2022 में उन्हें फिर से शुरू किया। वहीं, 2023 में विधानसभा चुनावों और NEP लागू करने की वजह से कुछ समय के लिए चुनाव स्थगित किए गए थे, लेकिन दिसंबर 2023 में सत्ता परिवर्तन के बाद अब तक छात्रसंघ चुनाव बहाल नहीं किए गए हैं। इससे छात्रों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।