



मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत देते हुए 400 केवी और उससे अधिक क्षमता की ट्रान्समिशन लाइनों के निर्माण में भूमि अधिग्रहण हेतु पथाधिकार (ROW) मुआवजा नीति में संशोधन को मंजूरी दे दी है। यह निर्णय प्रदेश के हजारों किसानों की बरसों पुरानी मांग पर लिया गया है। इस नई नीति से ट्रान्समिशन टावरों और उनकी पथाधिकार पट्टियों के लिए उपयोग में ली जाने वाली भूमि का उचित एवं बढ़ा हुआ मुआवजा किसानों को प्रदान किया जाएगा।
ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने बताया कि पहले ट्रान्समिशन टावर के आधार क्षेत्र के लिए डीएलसी दरों पर 200% मुआवजा दिया जाता था। अब इसमें और 200% अतिरिक्त मुआवजा जोड़ा गया है। यानी अब कुल 400% मुआवजा किसानों को दिया जाएगा।
इसके अलावा, पथाधिकार कॉरिडोर के लिए भी क्षेत्र के अनुसार मुआवजा निर्धारित किया गया है —
ग्रामीण क्षेत्रों में: भूमि मूल्य का 30%
नगर पालिका/शहरी योजना क्षेत्रों में: भूमि मूल्य का 45%
नगर निगम/महानगरीय क्षेत्रों में: भूमि मूल्य का 60%
इस संशोधित नीति का लाभ केवल राज्य की सार्वजनिक एजेन्सियां ही नहीं, बल्कि पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन सहित सभी निजी कंपनियां भी किसानों को मुआवजा देने के लिए बाध्य होंगी। यह नीति राज्यीय और अंतरराज्यीय दोनों प्रकार की ट्रान्समिशन परियोजनाओं पर समान रूप से लागू होगी।
मुख्यमंत्री शर्मा के इस निर्णय से राज्य में ऊर्जा आधारभूत संरचना के विकास को गति मिलेगी और उपभोक्ताओं को बेहतर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी। किसानों के हितों की रक्षा करते हुए लिया गया यह निर्णय सरकार की संवेदनशील और विकासोन्मुख नीतियों को दर्शाता है।