



भारत में उपराष्ट्रपति देश का दूसरा सर्वोच्च संवैधानिक पद होता है। हाल ही में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे की खबर ने लोगों का ध्यान संविधान की उन धाराओं की ओर खींचा है जो इस पद से इस्तीफे या हटाए जाने की प्रक्रिया को स्पष्ट करती हैं। इसी संदर्भ में भारतीय संविधान का अनुच्छेद 67A चर्चा का विषय बना है।
अनुच्छेद 67 के अनुसार, उपराष्ट्रपति निम्नलिखित परिस्थितियों में पद पर नहीं रहते:
स्वेच्छा से इस्तीफा देना:
उपराष्ट्रपति अगर स्वयं पद छोड़ना चाहते हैं, तो वे भारत के राष्ट्रपति को लिखित रूप में इस्तीफा दे सकते हैं।
इस्तीफा देने के बाद यह पद तुरंत खाली हो जाता है, जब तक कि राष्ट्रपति उसे स्वीकार न कर ले।
राज्यसभा के विशेष प्रस्ताव द्वारा हटाया जाना (Impeachment जैसी प्रक्रिया):
यदि उपराष्ट्रपति संविधान का उल्लंघन करते हैं या गंभीर कारणों से उन्हें पद से हटाना हो, तो:
राज्यसभा में एक प्रस्ताव लाया जा सकता है।
इसे सदन के कुल सदस्यों के बहुमत और मौजूद सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत से पारित किया जाना होता है।
इसके बाद लोकसभा को भी इस प्रस्ताव पर सहमति देनी होती है।
कार्यकाल पूरा होना:
उपराष्ट्रपति का कार्यकाल 5 वर्षों का होता है। कार्यकाल पूरा होने पर वह पद से हट जाते हैं।
उपराष्ट्रपति अगर बीमार हो जाएं, निजी कारणों से हटना चाहें या फिर संसद उन्हें हटाना चाहे, तो संविधान उसकी पूरी प्रक्रिया तय करता है।
इस्तीफे की स्थिति में राष्ट्रपति को पत्र देकर पद छोड़ा जा सकता है।
अगर उपराष्ट्रपति को हटाना हो तो केवल संसद ही यह कर सकती है, वो भी बहुत मजबूत बहुमत से।
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए इस्तीफा दिया। यह इस्तीफा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को सौंपा गया और उन्होंने इसे स्वीकार कर लिया। यह इस्तीफा अनुच्छेद 67 के तहत ही दिया गया है।