Saturday, 29 August 2026

तीसरे निलंबन मामले में मेयर मुनेश गुर्जर को राहत या नहीं ? हाईकोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित


तीसरे निलंबन मामले में मेयर मुनेश गुर्जर को राहत या नहीं ? हाईकोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित

जयपुर हेरिटेज नगर निगम की निलंबित मेयर मुनेश गुर्जर के तीसरे निलंबन से संबंधित मामले में राजस्थान हाईकोर्ट में गुरुवार को अहम सुनवाई हुई। 

न्यायमूर्ति अनूप ढंड की एकलपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया है। वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक मेहता ने मेयर गुर्जर की ओर से बहस करते हुए तर्क दिया कि राज्य सरकार ने नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत का पालन नहीं किया और बिना पूर्व सूचना या सुनवाई का अवसर दिए एकतरफा रूप से निलंबन आदेश जारी कर दिया। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों को कर्मचारियों की तरह नहीं देखा जा सकता क्योंकि वे जनता द्वारा चुने गए होते हैं, इसलिए उन्हें पद से हटाने से पहले समुचित प्रक्रिया अपनाना जरूरी है।

सरकार की ओर से बहस करते हुए कहा गया कि निलंबन से पूर्व गुर्जर को नोटिस भेजा गया था, लेकिन उनका जवाब असंतोषजनक पाया गया। साथ ही उनके विरुद्ध भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप भी हैं, जो उनके निलंबन को उचित ठहराते हैं।

जयपुर हेरिटेज नगर निगम की निलंबित मेयर गुर्जर की ओर से यह भी आरोप लगाया गया कि सरकार ने इस मामले में दो-दो जांच अधिकारी नियुक्त किए, जिनमें से एक का कोई पत्र उन्हें कभी प्राप्त नहीं हुआ, जबकि दूसरे का पत्र बिना हस्ताक्षर के था। सुनवाई की जो तारीख तय की गई, वह एक सार्वजनिक अवकाश था और जब एलएसजी को अपनी स्थिति स्पष्ट करने हेतु पत्र लिखा गया, तो उसके अगले दिन ही निलंबन का आदेश जारी कर दिया गया।

गौरतलब है कि जयपुर हेरिटेज नगर निगम की निलंबित मेयर गुर्जर का अब तक का कार्यकाल मात्र 13 महीनों का रहा है और इस दौरान उन्हें तीन बार निलंबित किया गया। कांग्रेस सरकार ने पहले उन्हें 5 अगस्त 2023 और 22 सितंबर 2023 को निलंबित किया था, जिन दोनों आदेशों को हाईकोर्ट ने बाद में निरस्त कर दिया। इसके बाद वर्तमान सरकार ने 23 सितंबर 2024 को तीसरी बार उन्हें निलंबित कर दिया, जिसकी वैधता को लेकर अब कोर्ट में सुनवाई हुई है।

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