Saturday, 29 August 2026

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की मानवीय पहल: अब असहाय और अज्ञात रोगियों को मिलेगा निःशुल्क इलाज


मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की मानवीय पहल: अब असहाय और अज्ञात रोगियों को मिलेगा निःशुल्क इलाज

मुख्य बिंदु:

  • पहचान पत्र के अभाव में इलाज से वंचित रोगियों को मिलेगा अब निःशुल्क इलाज।

  • चिकित्सा शिक्षा और सामाजिक न्याय विभाग के बीच एमओयू हस्ताक्षरित।

  • ट्रस्ट/एनजीओ के प्रमाण पत्र से मिलेगा समुचित उपचार।

  • मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की मानवीय पहल से खुला जीवन रक्षा का मार्ग।

  • आरएमआरएस के माध्यम से व्यय का वहन

जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के संवेदनशील मार्गदर्शन में राज्य सरकार ने अनाथ, अज्ञात, मानसिक रूप से अक्षम, लावारिस और बेसहारा रोगियों के लिए निःशुल्क इलाज की नई व्यवस्था लागू की है। यह निर्णय राज्य सरकार के मानवीय दृष्टिकोण का एक सशक्त उदाहरण है, जिससे समाज के सबसे कमजोर वर्ग को स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच सुनिश्चित होगी।

इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए चिकित्सा शिक्षा विभाग और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के बीच एमओयू (सहमति पत्र) किया गया है। इसके अंतर्गत अब किसी भी रजिस्टर्ड धर्मार्थ ट्रस्ट या एनजीओ के प्रमाण पत्र के आधार पर इन रोगियों को राजकीय चिकित्सा संस्थानों में निःशुल्क इलाज, ऑपरेशन, इंप्लांट आदि सुविधाएं मिल सकेंगी, भले ही उनके पास आधार, जन आधार या किसी भी तरह का पहचान पत्र न हो।

क्यों नहीं मिल पाता था पहले इलाज?

चिकित्सा शिक्षा विभाग के अनुसार, कई बार रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, धार्मिक स्थल आदि पर मानसिक रूप से अस्वस्थ, लावारिस या अज्ञात रोगी पाए जाते थे, जिन्हें ट्रस्ट या एनजीओ द्वारा अस्पताल लाया तो जाता था, लेकिन पहचान पत्र के अभाव में उन्हें आयुष्मान भारत योजना या मुख्यमंत्री चिरंजीवी योजना का लाभ नहीं मिल पाता था। ऐसे में वे इलाज से वंचित रह जाते थे।

मुख्यमंत्री के निर्देश से खुला जीवन रक्षा का रास्ता

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इस गंभीर समस्या को समझते हुए निर्देश दिए कि ऐसे असहाय रोगियों को भी बिना भेदभाव के निःशुल्क चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई जाएं। इसके बाद चिकित्सा शिक्षा और सामाजिक न्याय विभाग ने संयुक्त रूप से दिशा-निर्देश जारी किए। अब रजिस्टर्ड एनजीओ/ट्रस्ट को केवल यह प्रमाणित करना होगा कि लाया गया रोगी असहाय, अज्ञात या लावारिस है, और यह प्रमाण पत्र ही इलाज के लिए पर्याप्त होगा।

एमओयू की प्रमुख बातें:

  • निःशुल्क चिकित्सा सुविधा अब अज्ञात और बेसहारा रोगियों को भी मिलेगी।

  • केवल ट्रस्ट/एनजीओ द्वारा जारी प्रमाण पत्र से इलाज संभव होगा।

  • व्यय राजस्थान मेडिकल रिलीफ सोसायटी (RMRS) के माध्यम से वहन किया जाएगा।

  • एक संयुक्त समिति ट्रस्टों को अधिकृत करेगी और प्रक्रिया पारदर्शी रखेगी।

मानवता की दिशा में बड़ा कदम

राज्य सरकार की यह पहल न केवल स्वास्थ्य के अधिकार की दिशा में ठोस कदम है, बल्कि यह संवेदनशील और समावेशी प्रशासन का उदाहरण भी है। इससे गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वालों, विधवाओं, वृद्धजनों, दुर्घटना पीड़ितों और बेसहारा लोगों को सहज इलाज मिल सकेगा।

Previous
Next

Related Posts