



जयपुर। राजस्थान विश्वविद्यालय का 34 वां दीक्षांत समारोह गुरुवार को गरिमामय वातावरण में आयोजित हुआ। समारोह की अध्यक्षता राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने की, जबकि विधानसभा अध्यक्ष प्रो. वासुदेव देवनानी ने दीक्षांत भाषण दिया। कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री एवं उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा और भाजपा के राष्ट्रीयमहासचिव सांसद अरुण सिंह भी उपस्थित रहे।
राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने अपने उद्बोधन में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) को भारतीय मूल्यों की संवाहक बताते हुए कहा कि यह नीति भारतीय संस्कृति, नैतिकता और आत्मनिर्भरता पर आधारित है। उन्होंने कहा कि अंग्रेजों ने लॉर्ड मैकाले की शिक्षा पद्धति थोपकर गुलाम मानसिकता विकसित की थी, लेकिन अब देश भारतीयता आधारित शिक्षा की ओर लौट रहा है।
राज्यपाल ने यह भी कहा कि 75% स्वर्ण पदक बालिकाओं ने प्राप्त किए, जो यह दर्शाता है कि महिला शिक्षा में क्रांतिकारी परिवर्तन हो रहा है। उन्होंने महर्षि अरविंद, भास्कराचार्य, लीलावती और स्वामी विवेकानंद जैसे ऐतिहासिक व्यक्तित्वों का उदाहरण देते हुए विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अर्जित शिक्षा का उपयोग राष्ट्र निर्माण में करें।
विधानसभा अध्यक्ष प्रो. वासुदेव देवनानी ने अपने भाषण में कहा कि राजस्थान सरकार ने अब "कुलपति" की जगह "कुलगुरु" शब्द के उपयोग का निर्णय लिया है, क्योंकि “कुलगुरु शब्द में ही शिक्षा का गौरव निहित है।” उन्होंने भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा को आधुनिक तकनीकी के संदर्भ में प्रस्तुत करते हुए कहा कि संजय द्वारा महाभारत में युद्ध का आंखों देखा हाल सुनाना आज के "सीधा प्रसारण" (Live Telecast) की ही रूपरेखा थी।
डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने कहा कि उच्च शिक्षा ही विकसित भारत की नींव है और इसके लिए समाज के हर वर्ग को साथ आना होगा। सांसद अरुण सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सेना की वीरता का उल्लेख करते हुए इसे नए भारत की सशक्त छवि बताया।
समारोह में कुलगुरु डॉ. अल्पना कटेजा ने विश्वविद्यालय की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। कार्यक्रम में राज्यपाल ने विद्यार्थियों को उपाधियाँ व स्वर्ण पदक प्रदान किए और सभी को राष्ट्र निर्माण में भागीदारी के लिए प्रेरित किया।