



शिवमहापुराण कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने जीवन को सार्थक बनाने वाली अनेक सीखें सोमवार को शिव पुराण कथा के दौरान दीं। उन्होंने कहा कि जब समाज में कोई सत्कर्म, यज्ञ या कथा हो, तो व्यक्ति को उसमें सहयोग करना चाहिए, अवरोध नहीं। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि अगर भगवान ने आपको किसी उच्च पद पर बैठाया है, तो उस पद की गरिमा बनाए रखें, और सत्कर्म में सहायता करें न कि पांव अड़ाएं।
उन्होंने कहा कि व्यक्ति को अपनी वाणी, पद, प्रतिष्ठा और अहम पर संयम रखना चाहिए। जब कुर्सी नहीं रहती तो वही लोग—खासकर संतान—आपके कर्मों का हिसाब मांगती है। इसलिए व्यापार, नौकरी या जीवन के किसी क्षेत्र में हों, अपने कर्मों से दूसरों का दिल न दुखाएं। अंततः भगवान ही सबका हिसाब लेते हैं, और आपके पद, डिग्री या दौलत का वहां कोई मोल नहीं होता।
शिवमहापुराण कथावाचक प्रदीप मिश्रा ने आज के युवाओं की मानसिकता पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि कई बच्चे पास के मंदिर नहीं जाते, लेकिन अमरनाथ या केदारनाथ की योजना जरूर बनाते हैं। उन्होंने कहा कि तीर्थ की भावना पहले पास के मंदिर से शुरू होनी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई पुरुष पाप की कमाई घर लाता है, तो उसकी धर्मपत्नी उस पाप की भागीदार नहीं होती। धर्मपत्नी कभी पति से गलत कमाई नहीं मांगती, बल्कि पराई स्त्री ही गलत रास्ता दिखा सकती है। उन्होंने कहा कि कमाई के हिस्सेदार तो बहुत होंगे, लेकिन पाप के हिस्सेदार कोई नहीं होगा।
शिवमहापुराण कथावाचक प्रदीप मिश्रा ने पुरुषों को सलाह दी कि वे गुस्सा घर के बाहर छोड़कर आएं। अगर पुरुष नारायण की तरह व्यवहार करेंगे, तो पत्नी लक्ष्मी की तरह रहेगी। यदि वह शेर की तरह रहेगा, तो पत्नी शेरावाली बनकर उसका सामना करेगी। उन्होंने भगवान शंकर के जीवन से शांत रहने की प्रेरणा लेने का आह्वान किया।