Saturday, 29 August 2026

सरकारी अधिवक्ताओं की नियुक्तियों में योग्यता को आधार बनाने की मांग, हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर


सरकारी अधिवक्ताओं की नियुक्तियों में योग्यता को आधार बनाने की मांग, हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर

राजस्थान हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर कर राज्य सरकार द्वारा अतिरिक्त महाधिवक्ता, सरकारी वकील और लोक अभियोजकों की नियुक्तियों को राजनीतिक आधार पर करने की परंपरा पर सवाल उठाए गए हैं। याचिका अधिवक्ता पूनम चन्द भण्डारी द्वारा दायर की गई है, जिसमें मांग की गई है कि इन नियुक्तियों को योग्यता, अनुभव, कानूनी ज्ञान और ईमानदारी जैसे मापदंडों के आधार पर किया जाए।

याचिका में कहा गया है कि वर्षों से इन पदों पर राजनीतिक प्रभाव से नियुक्तियाँ की जाती रही हैं, जिससे न्यायिक प्रक्रिया बाधित होती है। इस कारण न केवल मुकदमों की सुनवाई में देरी होती है, बल्कि न्यायालय का कीमती समय और सरकारी धन भी बर्बाद होता है। याचिका में सर्वोच्च न्यायालय के 'महावीर व अन्य बनाम हरियाणा राज्य' केस का हवाला देते हुए कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने भी सरकारी वकीलों की नियुक्तियों में मेरिट के अभाव पर चिंता जताई थी।

प्रकरण की सुनवाई न्यायमूर्ति मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति मुकेश राजपुरोहित की खंडपीठ द्वारा की गई। सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता की ओर से कहा गया कि जोधपुर में इस विषय पर पहले एक मामला निस्तारित हुआ है, जिसकी पुनर्विचार याचिका लंबित है और जयपुर में एक अन्य मामला भी विचाराधीन है। इस पर कोर्ट ने महाधिवक्ता को दो सप्ताह में इन आदेशों की प्रति प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

याचिका में वरिष्ठ अधिवक्ताओं डॉ. टीएन शर्मा, अभिनव भंडारी, और अन्य अधिवक्ताओं आईजी खतूरिया, राकेश चंदेल, भूपेंद्र सिंह राव, विश्व भारद्वाज ने याचिकाकर्ता का समर्थन किया और कोर्ट में पक्ष रखा। याचिका में यह भी मांग की गई है कि सरकार को इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट की तर्ज पर स्पष्ट गाइडलाइन बनानी चाहिए जिससे योग्य अधिवक्ताओं को अवसर मिले और न्याय प्रक्रिया को गति मिले। प्रकरण को दो सप्ताह बाद सूचीबद्ध करने का आदेश दिया गया है।

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