



राजस्थान प्रशासनिक सेवा परिषद (आरएएस एसोसिएशन) ने नॉन आरएएस अधिकारियों को आईएएस में प्रमोट करने के राज्य सरकार के फैसले को चुनौती देने के मामले में हाईकोर्ट द्वारा लगाई गई 2 लाख रुपये की जुर्माना राशि को अब राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (रालसा) में जमा करा दिया है। जुर्माना भरने की रसीद एसोसिएशन की ओर से राजस्थान हाईकोर्ट में पेश की गई, जिसके बाद कोर्ट ने प्रार्थना पत्र को निस्तारित कर दिया।
गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने करीब पांच महीने पहले इस याचिका को व्यक्तिगत हितों से प्रेरित बताते हुए खारिज कर दिया था और कोर्ट का समय बर्बाद करने के आरोप में 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। इसके विरुद्ध आरएएस एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रखा। हालांकि, शीर्ष अदालत ने जुर्माना राशि को घटाकर 2 लाख रुपये कर दिया था।
यह मामला उस समय उठा जब आरएएस एसोसिएशन ने सरकार के अन्य सेवाओं से आईएएस में प्रमोशन देने के निर्णय पर सवाल उठाते हुए कहा था कि राज्य सरकार पर्याप्त आरएएस अधिकारियों की मौजूदगी के बावजूद नियमों से परे जाकर हर साल नॉन सिविल सर्विसेज से प्रमोशन के लिए सिफारिशें भेज रही है।
सरकार की ओर से दलील दी गई कि नियमों के तहत कुल 33.33% पदों में से अधिकतम 15% पदों पर ही नॉन आरएएस अधिकारियों को प्रमोट किया जा सकता है और अब तक की गई सभी नियुक्तियां इस सीमा में ही रही हैं।
दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने कहा था कि याचिका का उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग कर संस्थानिक हित की आड़ में व्यक्तिगत स्वार्थ सिद्ध करना है, इसीलिए इस पर जुर्माना लगाया गया।