Sunday, 06 April 2025

समरावता थप्पड़ कांड: राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने SDM को माना दोषी, नरेश मीणा की गिरफ्तारी पर उठे सवाल


समरावता थप्पड़ कांड: राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने SDM को माना दोषी, नरेश मीणा की गिरफ्तारी पर उठे सवाल

राजस्थान के बहुचर्चित समरावता थप्पड़ कांड में बड़ा मोड़ सामने आया है। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) ने मामले की विस्तृत जांच के बाद दौसा जिले के SDM को दोषी ठहराया है। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि SDM ने पद के दुरुपयोग के तहत एक अनुसूचित जनजाति की महिला के साथ अमानवीय और असंवैधानिक व्यवहार किया। साथ ही आयोग ने इस पूरे प्रकरण में पूर्व मंत्री नरेश मीणा की गिरफ्तारी को भी संदिग्ध करार देते हुए उसकी पुनः निष्पक्ष जांच की सिफारिश की है।

यह मामला वर्ष 2023 में तब सुर्खियों में आया था जब दौसा जिले के लालसोट विधानसभा क्षेत्र के समरावता गांव में SDM द्वारा एक जनजातीय महिला को थप्पड़ मारने की घटना कैमरे में कैद हुई थी। घटना के बाद कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री नरेश मीणा ने महिला के पक्ष में आवाज उठाई, लेकिन कुछ ही समय बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। इस गिरफ्तारी को लेकर तब से ही राजनीतिक प्रतिशोध की आशंका जताई जाती रही है।

आयोग की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि SDM की कार्रवाई से अनुसूचित जनजाति समुदाय की महिला के मान-सम्मान और संवैधानिक अधिकारों का हनन हुआ। रिपोर्ट में यह संकेत भी दिए गए हैं कि नरेश मीणा की गिरफ्तारी में राजनीतिक द्वेष की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

आयोग ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि SDM के खिलाफ विभागीय व कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही पीड़ित महिला को मुआवजा और सुरक्षा भी प्रदान की जाए। इसके अलावा आयोग ने नरेश मीणा की गिरफ्तारी और उससे जुड़ी प्रक्रियाओं की पुनः निष्पक्ष जांच कराए जाने का सुझाव भी दिया है।

इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ गई है। नरेश मीणा के समर्थकों ने इसे जनजातीय समाज की नैतिक जीत बताया है। वहीं, प्रशासनिक गलियारों में SDM के खिलाफ संभावित कार्रवाई को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। यह प्रकरण अब न केवल जन अधिकारों का सवाल बन गया है बल्कि राज्य की प्रशासनिक निष्पक्षता और राजनीतिक जवाबदेही पर भी सवाल खड़ा कर रहा है।

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