जयपुर में श्याम नगर थाना पुलिस ने एक बड़ी धोखाधड़ी का खुलासा करते हुए जेडीए का फर्जी पट्टा बनाकर चार करोड़ रुपए में प्लॉट बेचने वाली शातिर गैंग के तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस गिरोह ने मूल दस्तावेजों की नकली प्रतियां बनाकर प्लॉट बेचा और धोखाधड़ी से मोटी रकम हड़प ली। डीसीपी (साउथ) दिगंत आनंद के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में अंशुल खन्ना निवासी वैशाली नगर, रिषभ देव शर्मा निवासी करौली, और राकेश कुमार सैनी निवासी अलवर शामिल हैं। पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि उन्होंने कर्ज चुकाने के लिए यह योजना बनाई और नकली दस्तावेजों के आधार पर प्लॉट बेचकर मिली राशि आपस में बांट ली।
इस पूरे फर्जीवाड़े की शुरुआत तब हुई जब शिकायतकर्ता गोविंद नारायण परतानी ने श्याम नगर थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई। उन्होंने बताया कि वर्ष 1981 में उनकी पत्नी श्यामा देवी के नाम पर विवेक विहार में एक प्लॉट खरीदा गया था, जिसका जेडीए से वर्ष 2021 में पट्टा भी लिया गया था। कुछ दिन पहले एक रिश्तेदार ने जानकारी दी कि उस प्लॉट के फर्जी कागजात बाजार में घूम रहे हैं, जिनमें उनकी पत्नी के नाम को 'श्यामा परतानी' करके एक पुरुष की फोटो लगाई गई है। पुलिस जांच में सामने आया कि संबंधित मुख्त्यारनामा कभी रजिस्टर्ड ही नहीं हुआ था और पूरा दस्तावेज एडिटिंग टूल्स के माध्यम से बनाया गया था।
आरोपी अंशुल खन्ना ने पूछताछ में बताया कि उसने अपने तीन दोस्तों के साथ मिलकर जून 2024 में 38 लाख का कर्ज लिया था और उसे चुकाने के लिए फर्जीवाड़े का रास्ता अपनाया। जेडीए की वेबसाइट से प्लॉट की जानकारी निकालकर एडिटिंग के जरिए नकली पट्टा, चालान और पहचान पत्र बनाए गए। दस्तावेजों पर फर्जी सील-मोहर लगाई गई और मालिक के नाम को बदलते हुए महिला की जगह पुरुष की फोटो लगाई गई। बाद में इस प्लॉट को दो लोगों को बेचा गया—पहले नरेश गुप्ता को 75 लाख में डील की गई लेकिन रजिस्ट्री नहीं करवाई गई, फिर जानकी शरण नामक व्यक्ति को 3.20 करोड़ में बेच दिया गया और उनकी बहू सपना के नाम पर रजिस्ट्री करवा दी गई।
पुलिस अब इस गैंग से जुड़े अन्य लोगों की तलाश कर रही है, जिनमें चेतन शर्मा (सीए), विक्रम सिंह नामक कथित दलाल और दस्तावेजों की तैयारियों में सहायता करने वाले अन्य व्यक्ति शामिल हैं। पुलिस ने पीड़ित को आश्वासन दिया है कि उन्हें न्याय मिलेगा और अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।