वक्फ संशोधन बिल 2024 के खिलाफ शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में दो याचिकाएं दाखिल की गईं। ये याचिकाएं कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद (किशनगंज, बिहार) और AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी द्वारा दाखिल की गई हैं। दोनों सांसदों ने इस संशोधन को संविधान के मूल अधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता के विरुद्ध बताते हुए इसे चुनौती दी है।
उल्लेखनीय है कि वक्फ संशोधन बिल 2 और 3 अप्रैल को लोकसभा और राज्यसभा में क्रमशः 12-12 घंटे की लंबी चर्चा के बाद पारित हुआ था। अब यह बिल राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा और उनकी सहमति मिलने के बाद इसे कानून का रूप मिल जाएगा।
राज्यसभा से बिल पास होने के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने सुप्रीम कोर्ट जाने की घोषणा की थी। वहीं, तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी DMK ने भी इस बिल के खिलाफ अदालत जाने का संकेत दिया था।
विपक्ष इस बिल को मुस्लिम समाज की सम्पत्ति और धार्मिक अधिकारों के विरुद्ध मान रहा है, जबकि सरकार इसे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने वाला कदम बता रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वक्फ संशोधन बिल के पारित होने को “एक बड़ा सुधार” बताते हुए कहा कि यह कानून पसमांदा मुसलमानों और खासकर मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करेगा। उन्होंने शुक्रवार को X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा-“वक्फ संपत्तियों में दशकों से गड़बड़ी हो रही थी, जिससे गरीबों और मुस्लिम महिलाओं को नुकसान हो रहा था। यह नया कानून उन अनियमितताओं को दूर करेगा और पारदर्शिता लाएगा।”
बिल के विरोध में AIMIM सांसद ओवैसी ने संसद में चर्चा के दौरान बिल की कॉपी फाड़कर विरोध जताया था और सदन की कार्यवाही छोड़कर बाहर चले गए थे।
अब जबकि यह मुद्दा संसद से निकलकर न्यायपालिका के पटल पर पहुंच गया है, यह देखना अहम होगा कि सुप्रीम कोर्ट इस बिल की संवैधानिक वैधता को लेकर क्या फैसला करता है।