वक्फ संशोधन विधेयक 2024 को लेकर लोकसभा में बुधवार को दिनभर चली तीखी बहस और आरोप-प्रत्यारोप के बाद अंततः 12 घंटे की लंबी चर्चा के उपरांत यह बिल पास हो गया। बिल के पक्ष में 288 सांसदों ने मतदान किया, जबकि 232 सांसदों ने इसका विरोध किया। इस महत्वपूर्ण विधेयक को अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने पेश किया था और इसे उन्होंने "उम्मीद" (Unified Waqf Management Empowerment, Efficiency and Development) नाम दिया।
बिल को केंद्र की गठबंधन सरकार में शामिल दलों TDP, JDU और LJP का समर्थन मिला। चर्चा के दौरान किरेन रिजिजू ने करीब 58 मिनट तक अपनी बात रखी और बताया कि कैसे पूर्ववर्ती UPA सरकार ने 2014 में चुनाव से ठीक पहले 123 प्राइम प्रॉपर्टीज दिल्ली वक्फ बोर्ड को ट्रांसफर कर दी थीं, जो पूरी तरह वोट बैंक की राजनीति थी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यह संशोधन अब नहीं किया गया होता, तो “जिस संसद भवन में हम बैठे हैं, उस पर भी वक्फ का दावा किया जा सकता था।”
विपक्ष की ओर से सबसे तीखा विरोध AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने किया। उन्होंने बिल को “मुसलमानों को जलील करने की कोशिश” करार देते हुए संसद में ही बिल की प्रति फाड़ दी और वॉकआउट कर गए। उनका यह विरोध चर्चा का केंद्र बन गया।
गृह मंत्री अमित शाह ने बिल का कड़ा बचाव किया और स्पष्ट कहा कि “वक्फ में कोई गैर-इस्लामिक प्रावधान नहीं जोड़ा गया है। यह बिल पारदर्शिता और व्यवस्था सुधार के लिए है, अल्पसंख्यकों को डराने के लिए नहीं।” उन्होंने कहा कि “वोट बैंक के लिए माइनॉरिटीज को गुमराह किया जा रहा है। अगर कोई कहता है कि माइनॉरिटीज यह बिल नहीं मानेगी तो यह लोकतंत्र को धमकी देने जैसा है। संसद का कानून सबको मानना ही होगा।”
भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने इस दौरान कहा, “भारत के लोग वक्फ के खौफ से आजादी चाहते हैं।” उन्होंने वक्फ संपत्तियों के दुरुपयोग और उसके नाम पर चल रही राजनीति पर सवाल उठाए।
बिल के पास होने के साथ ही केंद्र सरकार ने संकेत दे दिया है कि वह वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता, जवाबदेही और पुनर्गठन की दिशा में गंभीर है। हालांकि विपक्षी दलों और खासकर AIMIM जैसी पार्टियों ने इसे अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर हमला करार दिया है। अब यह देखना होगा कि राज्यसभा में इस बिल को लेकर क्या रुख अपनाया जाता है।