



जयपुर में नवसंवत्सर 2082 के आगमन पर परंपरागत और भव्य अंदाज में स्वागत किया गया। संस्कृति युवा संस्था एवं नवसंवत्सर उत्सव समारोह समिति के तत्वावधान में मंगलवार को जयपुर के आराध्य देव गोविंद देवजी मंदिर से चार श्वेत अश्वों (घोड़ों) की नगर परिक्रमा की शुरुआत हुई। वैदिक रीति से पूजन के बाद अश्वों को जयपुर की आठ दिशाओं में रवाना किया गया। इन घोड़ों के दोनों ओर नवसंवत्सर की शुभकामनाओं के बैनर लगे हुए थे, ढोल-नगाड़ों की थाप पर कार्यकर्ता नाचते-गाते हुए आगे बढ़ रहे थे, जो पूरे वातावरण को उत्सवमय बना रहे थे।
समारोह में संस्कृति युवा संस्था के अध्यक्ष पं. सुरेश मिश्रा, उनकी पत्नी नीलम मिश्रा, हवामहल विधायक महामंडलेश्वर बालमुकुंदाचार्य, पूर्व सांसद रामचरण बोहरा, पूर्व महापौर ज्योति खंडेलवाल, घाट के बालाजी महंत सुदर्शनाचार्य महाराज, और कई मंदिरों के संत-महंत, पुजारी, समाजसेवी, संस्थाएं एवं जयपुर शहर के गणमान्य लोग उपस्थित रहे। गोविंद देवजी मंदिर के महंत मानस गोस्वामी ने सभी संतों का स्वागत कर आशीर्वाद दिया।
ये अश्व क्रमशः खोले के हनुमान मंदिर (ईशान), गलता जी (पूर्व), गोनेर मंदिर (आग्नेय), सांगा बाबा (दक्षिण), स्वामीनारायण मंदिर (नैऋत्य), हाथोज हनुमानजी (पश्चिम), कदम्ब डूंगरी (वायव्य), और आमेर के काले हनुमान जी मंदिर (उत्तर) की ओर रवाना किए गए। ये अश्व 11 दिनों तक मंदिरों की परिक्रमा करते हुए नवसंवत्सर का प्रचार-प्रसार करेंगे। साथ ही, कार्यकर्ता युवाओं में नववर्ष के महत्व की जानकारी पंपलेट बांटकर दे रहे हैं।
इस सांस्कृतिक आयोजन में उपस्थित संतों और महंतों ने राजस्थान सरकार द्वारा भारतीय पंचांग आधारित नववर्ष (चैत्र शुक्ल प्रतिपदा) को राजस्थान स्थापना दिवस के रूप में मनाने के निर्णय की सराहना की। सभी ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का आभार जताया और इसे सनातन संस्कृति के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया।
कार्यक्रम में संस्कृति युवा संस्था के संरक्षक एडवोकेट एच.सी. गणेशिया, सर्व ब्राह्मण महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शोपत सिंह कायल, प्रदेश उपाध्यक्ष दिनेश शर्मा, जयपुर शहर अध्यक्ष अनिल सारस्वत, उपाध्यक्ष राजेश शांडिल, मुकेश मिश्रा, प्रमोद शर्मा, विनोद शर्मा, लक्ष्मण शर्मा सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल रहे। पूरा शहर "सनातन धर्म की जय हो" और "नवसंवत्सर का स्वागत है" जैसे नारों से गूंज उठा।