



जयपुर राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रदेश की नौकरशाही की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए वरिष्ठ IAS अधिकारी भवानी सिंह देथा, शुचि त्यागी और एक अन्य अधिकारी को कोर्ट में तलब किया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि न्यायालय के आदेशों की पालना वरिष्ठ अधिकारि यों द्वारा तब तक नहीं की जाएगी जब तक उन्हें तलब न किया जाए, तो यह लोकतंत्र और न्याय व्यवस्था के लिए खतरनाक प्रवृत्ति है।
न्यायाधीश उमाशंकर व्यास की एकलपीठ ने कहा कि सीनियर अधिकारी क्या कोर्ट में बुलाए बिना आदेशों की पालना नहीं करेंगे? यह प्रवृत्ति अत्यधिक गंभीर है, इससे न्यायपालिका की गरिमा और लोगों का विश्वास प्रभावित होता है।
यह आदेश लेक्चरर डॉ. डीसी डूडी की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान आया। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अजय चौधरी ने बताया कि डॉ. डूडी वर्तमान में गवर्नमेंट कॉलेज सांभर लेक में कार्यरत हैं। इससे पहले वे हरियाणा में लेक्चरर थे। 1998 में उनका राजस्थान में चयन हुआ था, लेकिन करियर एडवांसमेंट स्कीम (CAS) के तहत हरियाणा की पुरानी सेवा को सेवा लाभ में नहीं जोड़ा गया, जिससे उन्हें बढ़े हुए वेतनमान का लाभ देर से मिला।
वरिष्ठ अधिकारियों पर लोकसेवक के रूप में ज्यादा जिम्मेदारी होती है। लेकिन इस मामले में उन्होंने अपने कर्तव्यों की घोर उपेक्षा की है, जो न्याय व्यवस्था के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है।