



जयपुर में कलमकार मंच और राजस्थान प्रौढ़ शिक्षण समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित पुस्तक चर्चा एवं काव्य संध्या का आयोजन साहित्य और संवेदना से ओतप्रोत रहा। इस अवसर पर देश के प्रमुख साहित्यकार, पत्रकार और कवि एक मंच पर जुटे। कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकार नंद भारद्वाज ने कहा कि लेखक अपनी रचनाओं के माध्यम से अपना अनुभव, भावनाएं और समय की सामाजिक परिस्थितियों को शब्दों में ढालते हैं। लेखन में मानवीय दृष्टिकोण सबसे आवश्यक तत्व होता है।
कार्यक्रम की शुरुआत कवि सुन्दर बेवफ़ा की किताब ‘एहसास’ और पत्रकार-साहित्यकार राजेश शर्मा की किताब ‘मंथरा’ की चर्चा से हुई। एहसास पर पूनम भाटिया और सुनीता बिश्नोलिया ने संवेदनशील टिप्पणियां साझा कीं, वहीं मंथरा पर महेश कुमार और कविता मुखर ने गहन विश्लेषण प्रस्तुत किया।
लेखक राजेश शर्मा ने कहा कि यदि मंथरा और कैकेयी न होतीं, तो रामायण की कथा ही बदल जाती। यह पात्र कथानक को गति और दिशा देने वाले हैं।
कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार राजेंद्र बोड़ा, लेखक चरणसिंह पथिक, इतिहासकार फारुक आफरीदी, और संयोजक निशांत मिश्रा सहित अनेक गणमान्य साहित्यकारों ने विचार रखे।
काव्य संध्या में महेश कुमार, पूनम भाटिया, कविता मुखर, अरुण ठाकर, सुनीता बिश्नोलिया, प्रेम प्रकाश भूमिपुत्र, धीरेंद्र ठाकुर, लक्ष्मण सिंह, चन्द्रशेखर शर्मा ‘चन्द्रेश’, लाभेश शर्मा, और रमेश चिंतक सहित 12 से अधिक कवियों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं।
प्रशंसा और तालियों की गूंज के बीच यह आयोजन साहित्यप्रेमियों के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव बन गया। कार्यक्रम का समापन राजस्थान प्रौढ़ शिक्षण समिति के सचिव राजेंद्र बोड़ा के धन्यवाद ज्ञापन से हुआ।