



जयपुर हेरिटेज की पूर्व महापौर मुनेश गुर्जर के यहां भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) द्वारा छापेमारी में बरामद ₹ 41लाख 50हजार नकद की जांच के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) को अब राजस्थान हाईकोर्ट से जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय मिल गया है।
पूर्व महापौर पर पट्टों के बदले रिश्वत मांगने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। छापेमारी के दौरान उनके आवास से भारी नकदी बरामद हुई थी, जिसका कोई वैध स्रोत वह नहीं बता सकीं। ACB ने मामले की जांच के बाद मुनेश गुर्जर, उनके पति और दो अन्य को दोषी मानते हुए न्यायालय में चालान पेश कर दिया था।
इस बीच पब्लिक अगेंस्ट करप्शन संस्था ने 15 अक्टूबर 2024 को ईडी को शिकायत पत्र भेजा था, जिसमें PMLA (Prevention of Money Laundering Act) की धारा 3 के तहत कार्रवाई की मांग की गई थी। संस्था का कहना है कि भारी मात्रा में बरामद नकदी का स्रोत न बताना, मनी लॉन्ड्रिंग का मामला बनता है।
हालांकि ईडी की ओर से कोई जवाब न मिलने पर संस्था ने जनहित याचिका (PIL) हाईकोर्ट में दायर की। इस पर शुक्रवार को सुनवाई हुई, जहां पब्लिक अगेंस्ट करप्शन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पूनम चंद भंडारी, अधिवक्ता अभिनव भंडारी और डॉ. टीएन शर्मा ने पक्ष रखा।
सुनवाई के दौरान ईडी की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल आरडी रस्तोगी ने कोर्ट से जवाब दाखिल करने के लिए अवधि की मांग की। इस पर राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ, जिसमें न्यायमूर्ति इंद्रजीत सिंह एवं न्यायमूर्ति प्रमिल कुमार माथुर शामिल हैं, ने ईडी को चार सप्ताह का समय प्रदान किया है।