Saturday, 29 August 2026

अदालती आदेश की अवहेलना पर 2 IAS अफसर प्रवीण गुप्ता और भास्कर सावंत को 3 महीने की सिविल कारावास, हाई कोर्ट में दी चुनौती, सोमवार को सुनवाई


अदालती आदेश की अवहेलना पर 2 IAS अफसर प्रवीण गुप्ता और भास्कर सावंत को 3 महीने की सिविल कारावास, हाई कोर्ट में दी चुनौती, सोमवार को सुनवाई

जयपुर।राजस्थान में प्रशासनिक तंत्र को झटका देते हुए जयपुर की कॉमर्शियल कोर्ट-1 ने दो वरिष्ठ भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारियों को अदालती आदेश की अवहेलना के चलते तीन-तीन महीने के सिविल कारावास की सजा सुनाई है। यह आदेश PWD के अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) प्रवीण गुप्ता और जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) के ACS भास्कर ए. सावंत के विरुद्ध दिया गया है।

कोर्ट ने पाया कि दोनों विभागों ने अदालती निर्देशों के बावजूद बकाया भुगतान नहीं किया, जिससे संबंधित ठेकेदार कंपनियों को न्याय नहीं मिल पाया।

हाईकोर्ट में दी गई चुनौती, सोमवार को सुनवाई

दोनों वरिष्ठ IAS अधिकारियों ने सजा को राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती दी है, जहां सोमवार को सुनवाई निर्धारित है। मामले ने राज्य के प्रशासनिक हलकों में खलबली मचा दी है, क्योंकि यह फैसला न्यायिक आदेशों की अनुपालना न करने के गंभीर परिणामों को दर्शाता है।

167 करोड़ रुपए के भुगतान में लापरवाही: PWD का मामला

नागौर-मुकुंदगढ़ हाईवे प्राइवेट लिमिटेड ने वर्ष 2020-21 में सड़क निर्माण का कार्य किया था। अनुबंध में समय से पहले काम पूरा करने पर बोनस की शर्त थी। लेकिन बोनस के रूप में 167 करोड़ रुपये का भुगतान नहीं किया गया।

कंपनी ने आर्बिट्रेशन, फिर कॉमर्शियल कोर्ट और अंततः सुप्रीम कोर्ट तक न्याय की गुहार लगाई, लेकिन जब अदालती आदेश के बावजूद PWD ने भुगतान नहीं किया, तो कोर्ट ने विभाग की संपत्तियों की सूची मांगी और ACS प्रवीण गुप्ता से शपथ-पत्र तलब किया। शपथ-पत्र प्रस्तुत नहीं करने पर अदालत ने उन्हें 3 महीने के सिविल कारावास की सजा सुनाई।

 PHED का मामला: एलएंडटी को 31 करोड़ का बकाया

PHED विभाग द्वारा पाइपलाइन परियोजना में कार्यरत एलएंडटी कंपनी को 31 करोड़ रुपए का भुगतान नहीं किया गया। इस मामले में भी आर्बिट्रेटर ने कंपनी के पक्ष में आदेश दिया, जिसे कॉमर्शियल कोर्ट ने बरकरार रखा।

बार-बार अवसर दिए जाने के बावजूद जब ACS भास्कर ए. सावंत की ओर से शपथ-पत्र प्रस्तुत नहीं किया गया, तो कोर्ट ने उन्हें भी तीन महीने की सिविल कारावास की सजा सुनाई।

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