Saturday, 29 August 2026

जयपुर में 'एक देश एक चुनाव' सम्मेलन, साल 2034 में लोकसभा और सभी राज्यों की विधानसभाओं के एक साथ होंगे चुनाव : अर्जुनराम मेघवाल


जयपुर में 'एक देश एक चुनाव' सम्मेलन, साल 2034 में लोकसभा और सभी राज्यों की विधानसभाओं के एक साथ होंगे चुनाव : अर्जुनराम मेघवाल

केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने जयपुर में आयोजित ‘एक देश, एक चुनाव’ सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि साल 2034 में लोकसभा और सभी राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव एक साथ होंगे। उन्होंने बताया कि पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में गठित हाई लेवल कमेटी ने देश में पंचायत और नगर निकाय चुनाव भी एक साथ कराने का सुझाव दिया है।

2034 से लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जाएंगेपहले चरण में लोकसभा और विधानसभा चुनावों को एकसाथ कराने की योजनापूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की कमेटी ने पंचायत और नगर निकाय चुनाव एकसाथ कराने की सिफारिश की'एक देश, एक चुनाव' से देश की अर्थव्यवस्था को होगा बड़ा फायदा

 विस्तृत जानकारी:क्यों हो रही है 'एक देश, एक चुनाव' की चर्चा?

भारत में एकसाथ चुनाव कराने की परंपरा पहले भी रही है।1952, 1962 और 1967 में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ हुए थे।1983 में चुनाव आयोग ने अपनी रिपोर्ट में देश में एक साथ चुनाव कराने की सिफारिश की थी।लेकिन समय के साथ राज्यों की विधानसभाएं अलग-अलग समय पर भंग होने लगीं और यह प्रक्रिया बाधित हो गई।

2034 में क्या बदलेगा?

2034 में लोकसभा और सभी राज्यों की विधानसभा चुनाव एकसाथ होंगे। पंचायत और नगर निकाय चुनाव भी पहले चरण में लाने की योजना है।इससे बार-बार होने वाले चुनावों पर खर्च कम होगा और सरकार की कार्यक्षमता बढ़ेगी।

क्या कहा केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने?

"वन नेशन, वन इलेक्शन देश की आर्थिक उन्नति के लिए बहुत जरूरी है।"
"जब 1952, 1962 और 1967 में एक साथ चुनाव हो सकते थे, तो अब क्यों नहीं?"
"भारत ही नहीं, कई देशों में एक साथ चुनाव हो रहे हैं।"

किन देशों में लागू है एकसाथ चुनाव प्रणाली?

दक्षिणअफ्रीका,सूडान,बेल्जियम,जर्मन,फिलीपींस,इंडोनेशिया (मुस्लिम राष्ट्र) एक साथ चुनाव कराए जा रहे हैं।

एक देश एक चुनाव से क्या होगा फायदा?

चुनाव खर्च में कमी आएगी।
चुनावी आचार संहिता लागू होने से विकास कार्यों पर रोक नहीं लगेगी।
सरकार को अपनी पूरी अवधि में स्थिरता मिलेगी।
प्रशासनिक और सुरक्षा संसाधनों की बचत होगी।
मतदाता की भागीदारी बढ़ेगी।

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