



मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राजस्थान सरकार ने सुदृढ़ प्रसारण तंत्र और थर्मल एवं अक्षय ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए ऐतिहासिक फैसले लिए हैं। इसी कड़ी में राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (RVUNL) और सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड (SCCL) के बीच समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किए गए, जो राज्य को ‘ऊर्जादाता’ के रूप में स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
इस एमओयू के तहत तेलंगाना में 1600 मेगावाट की थर्मल ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित होंगी, जिसमें से 800-800 मेगावाट बिजली राजस्थान और तेलंगाना को प्राप्त होगी। इसके अलावा, राजस्थान में 1500 मेगावाट का सोलर पार्क भी स्थापित किया जाएगा। इस परियोजना पर कुल 22,000 करोड़ रुपये का निवेश होगा और हजारों लोगों के लिए रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान तेजी से ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन रहा है। प्रदेश के किसानों को 2027 तक दिन में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकार नीतिगत फैसले ले रही है और उनका समयबद्ध क्रियान्वयन किया जा रहा है। स्वच्छ ऊर्जा नीति-2024 के तहत, 2030 तक 125 गीगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य तय किया गया है। सरकार ने वर्ष 2031-32 तक 54,000 मेगावाट से अधिक विद्युत क्षमता के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए दूरगामी निर्णय लिए हैं।
राजस्थान सरकार ने हाल ही में 10 मार्च 2024 को केंद्र सरकार के साथ कई बड़े एमओयू किए, वहीं राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट में 2.28 लाख करोड़ रुपये के निवेश समझौते किए गए। इसके अलावा, पावर ग्रिड कॉरपोरेशन और आरवीयूएनएल के बीच 10,000 करोड़ रुपये का एमओयू भी किया गया है।
तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री एवं ऊर्जा मंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क ने कहा कि राजस्थान की सौर ऊर्जा क्षमता और तेलंगाना की थर्मल ऊर्जा उत्पादन दक्षता मिलकर देश के ऊर्जा क्षेत्र में नए आयाम स्थापित करेंगी। इस अवसर पर ऊर्जा राज्य मंत्री हीरालाल नागर, अतिरिक्त मुख्य सचिव ऊर्जा आलोक, प्रमुख शासन सचिव (तेलंगाना) संदीप कुमार सुल्तानिया, प्रमुख सचिव (मुख्यमंत्री कार्यालय) आलोक गुप्ता, आरवीयूएनएल के सीएमडी देवेन्द्र श्रृंगी और सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड के सीएमडी एन. बलराम सहित संबंधित विभागों के अन्य उच्च अधिकारी उपस्थित रहे।
यह एमओयू राजस्थान को ऊर्जा क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है, जिससे प्रदेश की बिजली जरूरतों को पूरा करने और स्वच्छ ऊर्जा के लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद मिलेगी।