



राजस्थान विधानसभा में सोमवार को अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने सदस्यों को सदन की मर्यादा बनाए रखने और नियमों का पालन करने की सख्त हिदायत दी। उन्होंने कहा कि जब आसन पैरों पर हो, तब कोई भी सदस्य सदन के अंदर या बाहर मूवमेंट नहीं करेगा।
जब विधानसभा अध्यक्ष आसन पर खड़े हों, तब कोई भी सदस्य सदन के अंदर या बाहर नहीं जाएगा।सभी विधायक अपनी-अपनी सीटों पर बैठेंगे और सदन की कार्यवाही में अनुशासन बनाए रखेंगे।
सदन में फोन पर बात करना प्रतिबंधित:सदन की गरिमा बनाए रखने के लिए फोन पर बातचीत पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगी।नाम पुकारे जाने पर ही संबंधित सदस्य को बोलने की अनुमति होगी।
भाषा में शालीनता आवश्यक:विधानसभा अध्यक्ष ने विधायकों से भाषा में संयम बरतने और शालीनता बनाए रखने का आग्रह किया।जब कोई सदस्य बोल रहा हो, तो दूसरे सदस्य उसे टोके नहीं और सम्मानजनक माहौल बनाए रखें।
मंत्रियों और अधिकारियों की उपस्थिति अनिवार्य:अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान संबंधित मंत्री और अधिकारियों की सदन में उपस्थिति अनिवार्य होगी।अध्यक्ष ने निर्देश दिया कि इस नियम का कठोरता से पालन किया जाए ताकि सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चले।
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि सदन में चलते समय किसी विधायक के सामने से गुजरना उचित नहीं है। यह सदन की पुरानी परंपरा है और सभी को इसका पालन करना चाहिए।विधायक अनावश्यक मूवमेंट से बचें और जब कोई विधायक अपनी बात रख रहा हो, तो उसे ध्यानपूर्वक सुना जाए।
विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने स्पष्ट रूप से कहा कि सदन की गरिमा और अनुशासन बनाए रखना सभी विधायकों की जिम्मेदारी है। सभी को निर्धारित नियमों का पालन करना होगा, ताकि विधानसभा की कार्यवाही व्यवस्थित और सुचारू रूप से संचालित हो सके।भाषा में शालीनता और नियमों का पालन ही लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूती प्रदान करेगा।