



मणिपुर में गुरुवार को केंद्र सरकार ने राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया। यह फैसला मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के इस्तीफे के 4 दिन बाद लिया गया। बीरेन सिंह ने 9 फरवरी को गवर्नर को इस्तीफा सौंपा था।
राज्य में 3 मई 2023 से जारी जातीय हिंसा के कारण 300 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।लगातार हिंसा और बिगड़ती कानून-व्यवस्था के कारण मुख्यमंत्री पर इस्तीफे का दबाव बढ़ रहा था।विपक्षी दलों ने भी एनडीए सरकार से मणिपुर की स्थिति पर जवाब मांगा था।
अब राज्य का प्रशासन केंद्र सरकार के अधीन होगा।राज्यपाल अंशु प्रकाश राज्य की जिम्मेदारी संभालेंगे।कोई मुख्यमंत्री या मंत्रिपरिषद नहीं होगा, राज्य के प्रशासनिक फैसले अब केंद्र सरकार के प्रतिनिधि लेंगे।
मणिपुर में मैतेई और कुकी समुदायों के बीच संघर्ष मई 2023 से चल रहा है।इस दौरान सैकड़ों गांवों को जलाया गया, हजारों लोग बेघर हुए और कई इलाकों में अब भी तनाव बना हुआ है।राज्य सरकार इस हिंसा को नियंत्रित करने में नाकाम रही, जिससे बीरेन सिंह पर इस्तीफे का दबाव बढ़ा।
कांग्रेस सहित विपक्षी दलों ने एनडीए सरकार पर मणिपुर में शांति बहाल करने में असफल रहने का आरोप लगाया।
विपक्ष ने राष्ट्रपति शासन लागू करने के फैसले पर भी सवाल उठाए और कहा कि चुनावी साल में यह कदम राजनीतिक है।
अब मणिपुर में केंद्रीय एजेंसियां पूरी तरह से प्रशासन की निगरानी करेंगी।राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद राज्य में कब चुनाव कराए जाएंगे, इसका फैसला केंद्र सरकार करेगी। राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की नजर इस पर टिकी है कि केंद्र सरकार अब मणिपुर में शांति बहाली के लिए क्या कदम उठाएगी।
मणिपुर में लगातार 21 महीने से जारी हिंसा और मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह के इस्तीफे के बाद केंद्र सरकार को राष्ट्रपति शासन लागू करने का फैसला लेना पड़ा। अब देखना होगा कि केंद्र सरकार किस तरह से राज्य में शांति और स्थिरता बहाल करने के लिए कदम उठाती है।
