भाजपा ने राजस्थान के 44 संगठनात्मक जिलों में से 27 जिलों के अध्यक्षों की घोषणा कर दी है। इस सूची में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह जिले भरतपुर सहित कई महत्वपूर्ण जिलों के नाम शामिल हैं।
आरएसएस से जुड़े 19 नेता बने जिला अध्यक्ष: भाजपा ने इस बार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के 19 नेताओं को जिला अध्यक्ष पद सौंपा है। इनमें सिरोही की डॉ. रक्षा भंडारी, अलवर दक्षिण के अशोक गुप्ता, अजमेर देहात के जीतमल प्रजापत, नागौर शहर के रामधन पोटलिया, बाड़मेर के अनंतराम बिश्नोई, बीकानेर देहात के श्याम पंचारिया, श्रीगंगानगर के शरणपाल सिंह मान, जोधपुर शहर के राजेंद्र पालीवाल, उदयपुर देहात के पुष्कर तेली, जैसलमेर के दलपत हिंगड़ा, पाली के सुनील भंडारी, सीकर के मनोज बाटड़, बांसवाड़ा के पूंजीलाल गायरी, जालोर के जसराज राजपुरोहित, राजसमंद के जगदीश पालीवाल, उदयपुर शहर के गजपाल सिंह राठौड़ प्रमुख रूप से शामिल हैं।
जातीय समीकरण: सामान्य और ओबीसी वर्ग को प्राथमिकता: भाजपा ने जातीय संतुलन साधते हुए सबसे अधिक 22 पद सामान्य और ओबीसी वर्ग को दिए हैं। हालांकि, आदिवासी (ST) समाज से एक भी नेता को जिला अध्यक्ष नहीं बनाया गया।
जाति के आधार पर जिला अध्यक्षों का वर्गीकरण:सामान्य वर्ग - 13 अध्यक्ष:वैश्य - 6,ब्राह्मण - 4,राजपूत - 2 सोनी समाज - 1
ओबीसी वर्ग - 9 अध्यक्ष: जाट - 3,बिश्नोई - 2,जांगिड़ - 1,तेली - 1,प्रजापत - 1,जट सिख - 1 गुर्जर समाज - 2 अध्यक्ष, MBC वर्ग - 3 अध्यक्ष,SC वर्ग - 2 अध्यक्ष,आदिवासी (ST) - 0 अध्यक्ष
अल्पसंख्यक समाज: सिख समुदाय से सिर्फ श्रीगंगानगर से शरणपाल सिंह मान को जगह मिली।मुस्लिम समाज का कोई प्रतिनिधित्व नहीं।महिलाओं की संख्या सिर्फ 10% इस सूची में महिला जिला अध्यक्षों की संख्या केवल 3 है, जो कुल 27 में से 10% ही हैं। सिरोही - डॉ. रक्षा भंडारी, भरतपुर - शिवानी दायमा, नागौर देहात - सुनीता माहेश्वरी
वसुंधरा राजे और संघ दोनों के नेताओं को तवज्जो: भाजपा ने पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे गुट के नेताओं को भी दो जिलों में जगह दी है, जबकि अन्य प्रमुख नियुक्तियों में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया और सिक्किम के राज्यपाल ओम माथुर की पसंद को भी ध्यान में रखा गया है।
संघ और भाजपा के प्रभाव को संतुलित करने की कोशिश: राजस्थान भाजपा ने इस बार आरएसएस के प्रभाव को अधिक प्राथमिकता दी है, लेकिन संगठनात्मक संतुलन बनाने के लिए कुछ जिलों में दिग्गज नेताओं की पसंद को भी महत्व दिया गया है। पार्टी ने सबसे ज्यादा ब्राह्मण, वैश्य और ओबीसी समाज के नेताओं को जिला अध्यक्ष बनाया, लेकिन आदिवासी समाज और मुस्लिम समुदाय को प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया।