



राजस्थान की राजधानी जयपुर में रविवार को LGBTQ+ (लेस्बियन, गे, बाइसेक्सुअल, ट्रांसजेंडर, क्वीयर) समुदाय ने प्राइड वॉक निकालकर अपने अधिकारों और समानता की मांग की। इस वॉक में देशभर से आए LGBTQ+ समुदाय के सदस्यों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और सहयोगियों ने भाग लिया।
यह प्राइड मार्च शहीद स्मारक से शुरू होकर एमआई रोड, अजमेरी गेट, न्यू गेट होते हुए अल्बर्ट हॉल तक पहुंचा। इस दौरान समुदाय के सदस्यों ने समान अधिकार, समाज में स्वीकार्यता और समलैंगिक विवाह की कानूनी मान्यता जैसी मांगों को बुलंद किया। वॉक की शुरुआत परंपरागत रूप से शहीद स्मारक पर नारियल फोड़कर की गई।
इस मौके पर डॉ. प्रीति चौधरी ने कहा कि, "यह प्राइड वॉक LGBTQ+ समुदाय को मुख्यधारा में शामिल करने और उनके अधिकारों को मान्यता दिलाने के लिए निकाली गई है। जयपुर में हर साल इस तरह के आयोजन किए जाते हैं, ताकि समाज में जागरूकता बढ़े।"
इस प्राइड मार्च में जयपुर के साथ-साथ देशभर के विभिन्न शहरों से LGBTQ+ समुदाय के लोग पहुंचे। पूजा, जो खुद इस समुदाय से हैं, ने कहा, "हम सबसे पहले इंसान हैं और हमें इंसान के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए।" उन्होंने समाज से आग्रह किया कि LGBTQ+ समुदाय को एक तृतीय लिंग के रूप में नहीं, बल्कि समाज का अभिन्न अंग माना जाए।
मनोवैज्ञानिक दीपक कश्यप ने कहा कि, "हम भी उसी मिट्टी से बने हैं, जिससे बाकी लोग बने हैं। हमें किसी से ऊपर या नीचे नहीं समझा जाना चाहिए।" उन्होंने जोर देकर कहा कि समाज को इस समुदाय को सम्मान और समान अधिकार देने चाहिए।
मुंबई से आए इंदर ने कहा कि वे अपने पार्टनर के साथ 12 साल से हैं, लेकिन भारत में कानून उन्हें एक साथ रहने की इजाजत नहीं देता। उन्होंने समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने की मांग की। इसी तरह, रविंद्र चौहान ने कहा कि, "प्राइड वॉक का मुख्य उद्देश्य LGBTQ+ समुदाय को समाज में समान दर्जा दिलाना है।"
कुलदीप शर्मा, जो लीगल एडवाइजर के रूप में इस प्राइड वॉक को समर्थन दे रहे हैं, ने कहा कि, "इस वॉक का उद्देश्य समाज में समानता का संदेश देना है। समाज को समझना चाहिए कि भले ही हम विविधता में हों, लेकिन हम सब इस देश के नागरिक हैं और समान अधिकारों के हकदार हैं।"
इस प्राइड वॉक के माध्यम से LGBTQ+ समुदाय ने समाज में अपने अधिकारों और स्वीकार्यता की मांग की। वॉक में शामिल लोगों ने इंसानियत, प्यार और समानता का संदेश देते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि LGBTQ+ समुदाय को समाज में बराबरी का दर्जा मिले और समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता दी जाए।