



जयपुर नगर निगम हेरिटेज की कार्यवाहक मेयर कुसुम यादव का कार्यकाल आज समाप्त होने वाला था, लेकिन इसे एक बार फिर दो महीने के लिए बढ़ा दिया गया है। अब वे 24 मार्च 2025 तक कार्यवाहक मेयर के पद पर बनी रहेंगी। हालांकि, नगर निगम हेरिटेज में संचालन समितियों के गठन को लेकर अब भी कोई निर्णय नहीं लिया गया है।
पिछले साल 23 सितंबर को भ्रष्टाचार के मामले में एसीबी द्वारा चालान पेश किए जाने के बाद तत्कालीन मेयर मुनेश गुर्जर को सरकार ने मेयर और पार्षद पद से निलंबित कर दिया था। मुनेश गुर्जर और उनके पति सुशील गुर्जर को पट्टा जारी करने के एवज में रिश्वत मांगने के मामले में गिरफ्तार किया गया था।
इस मामले में एसीबी ने मुनेश गुर्जर को भी आरोपी बनाया था। इसके बाद 24 सितंबर 2024 को सरकार ने कुसुम यादव को कार्यवाहक मेयर नियुक्त किया था। उनका शुरुआती कार्यकाल 60 दिनों का था, जिसे पहले भी दो महीने के लिए बढ़ाया गया था और अब एक बार फिर बढ़ाया गया है।
भ्रष्टाचार और निलंबन के चलते नगर निगम हेरिटेज में प्रशासनिक कामकाज पर असर पड़ा है। संचालन समितियों के गठन को लेकर कोई ठोस निर्णय नहीं हो सका है। यह मामला निगम के समुचित संचालन के लिए बेहद अहम है, लेकिन इस पर अब भी चर्चा लंबित है।
कुसुम यादव का कार्यवाहक मेयर के तौर पर कार्यकाल लगातार बढ़ता जा रहा है, जो नगर निगम में नेतृत्व संकट और प्रशासनिक जटिलताओं को दर्शाता है। 24 मार्च तक उनके कार्यकाल के बढ़ने से निगम में लंबित मामलों और संचालन समिति के गठन को लेकर आगे के फैसले पर नजरें टिक गई हैं।