



नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) देशभर में चल रहे करीब 200 टोल प्लाजा पर यूपी एसटीएफ ने मंगलवार रात छापेमारी कर करोड़ों का घोटाला उजागर किया है। इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
राजस्थान के चार टोल प्लाजा सहित आरोपी आलोक सिंह ने 12 राज्यों 200 में से 42 टोल प्लाजा पर सॉफ्टवेयर इंस्टॉल किया था। इनमें उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, छत्तीसगढ़, असम, जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्र, गुजरात, झारखंड, हिमाचल प्रदेश, ओडिशा, पश्चिम बंगालशामिल है। इन टोल बूथ पर एनएचएआई के सिस्टम के समानांतर सॉफ्टवेयर इंस्टॉल कर फ्रॉड किया जा रहा था।
एसटीएफ की पूछताछ में आलोक ने बताया- 'मैं MCA पास हूं। पहले टोल प्लाजा पर काम करता था। वहीं से टोल प्लाजा का ठेका लेने वाली कंपनियां के संपर्क में आया। इसके बाद टोल प्लाजा मालिकों की मिलीभगत से एक सॉफ्टवेयर बनाया। टोल प्लाजा पर लगे कंप्यूटर में अपने भी सॉफ्टवेयर को इंस्टॉल कर दिया, जिसका एक्सेस अपने लैपटॉप से कर लिया। इसमें टोल प्लाजा के आईटी कर्मियों ने भी साथ दिया।
टोल प्लाजा से बिना फास्टैग के गुजरने वाले वाहनों से दोगुना शुल्क हमारे सॉफ्टवेयर से वसूला जाता था। उसकी भी प्रिंट पर्ची एनएचएआई के सॉफ्टवेयर के समान ही होती थी। इस तरह से बिना फास्टैग वाले वाहनों से वसूली गई। अवैध वसूली के वाहन को वाहन शुल्क से मुक्त श्रेणी दिखाकर जाने दिया जाता था।
बिना फास्टैग वाले वाहनों से लिए गए टोल टैक्स की औसतन 5% धनराशि एनएचएआई के असली सॉफ्टवेयर से वसूली जाती है, जिससे सामान्य रूप से किसी को शक न हो कि बिना फास्टैग वाले वाहनों का टोल टैक्स खाते में नहीं जा रहा है, जबकि नियमानुसार बिना फास्टैग वाले वाहनों से वसूले जाने वाले टोल टैक्स का 50% एनएचएआई के खाते में जमा करना होता है।'
उत्तर प्रदेश एसटीएफ की कार्रवाई: यूपी एसटीएफ ने मंगलवार रात मिर्जापुर के अतरैला टोल प्लाजा पर छापा मारकर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। ये आरोपी एनएचएआई के कंप्यूटर सिस्टम में अपना सॉफ्टवेयर इंस्टॉल कर वाहनों से वसूले गए टोल में गबन कर रहे थे। आरोपियों ने खुलासा किया कि वे इस टोल से दो साल में 3 करोड़ 28 लाख रुपए की हेराफेरी कर चुके हैं।
राजस्थान के टोल प्लाजा पर घोटाले का असर:पूछताछ के दौरान आरोपियों ने बताया कि वे देश के 12 राज्यों के 200 टोल प्लाजा में यह फ्रॉड कर चुके हैं। राजस्थान के चार टोल प्लाजा—फुलेरा टोल प्लाजा,शाहपुरा टोल प्लाजा,कादीसहना टोल प्लाजा (एकेसीसी कंपनी) और शाउली टोल प्लाजा (एनुवेजन कंपनी) शामिल है।
इनमें भी एनएचएआई के समानांतर सॉफ्टवेयर इंस्टॉल कर हेराफेरी की जा रही थी। एसटीएफ की जानकारी के बाद एनएचएआई ने राजस्थान के इन टोल बूथ्स पर मौजूद सिस्टम को तुरंत रिप्लेस कर दिया है।
घोटाले का तरीका: आरोपी टोल प्लाजा पर अपने सॉफ्टवेयर के जरिए फास्टैग की जानकारी को बायपास कर, नकद कलेक्शन में गबन कर रहे थे। अकेले अतरैला टोल से प्रतिदिन ₹ 45 हजार का नुकसान हो रहा था।