



राजस्थान हाईकोर्ट ने डिजिटल अरेस्ट और साइबर क्राइम में हो रही बढ़ोतरी को गंभीरता से लेते हुए स्वप्रेरित प्रसंज्ञान लिया है। अदालत ने कहा कि साइबर अपराध दुनियाभर में तेजी से बढ़ रहे हैं और इसके कारण भारत में लाखों लोग प्रभावित हो रहे हैं। इससे न केवल लोग अपनी कमाई गंवा रहे हैं, बल्कि कई निर्दोषों की जान भी जा चुकी है।
सरकार और संस्थानों से जवाब तलब:केंद्र और राज्य सरकार, डीजीपी, आरबीआई, और अन्य पक्षकारों से पूछा गया है कि इन अपराधों को रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।अदालत ने ठोस कार्रवाई सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
डेटा सुरक्षा पर चिंता:अदालत ने कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और डिजिटल न्यूज पोर्टल्स के जरिए डेटा बेचा जा रहा है। इसे रोकने के लिए प्रौद्योगिकी नियम, 2021 बनाए गए हैं, लेकिन नियमों को सख्ती से लागू करने की जरूरत है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की भूमिका:सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर डेटा चोरी और बिक्री की घटनाएं बढ़ रही हैं।इन सूचनाओं के स्रोत का पता लगाने और डेटा सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता है।
डेटा चोरी पर रोकथाम:नियमों का सख्ती से पालन न करने पर दंड का प्रावधान है।
हाईकोर्ट ने इस मामले में सरकार से जल्द से जल्द ठोस कदम उठाने और साइबर क्राइम पर नियंत्रण के लिए पुख्ता कार्रवाई की रूपरेखा पेश करने को कहा है।