Saturday, 29 August 2026

नीमकाथाना का जिला दर्जा खत्म करने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती, भजनलाल सरकार के फैसले पर सवाल


नीमकाथाना का जिला दर्जा खत्म करने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती, भजनलाल सरकार के फैसले पर सवाल

भजनलाल सरकार के राजस्थान में 9 जिलों और 3 संभागों को खत्म करने के फैसले को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। गंगापुरसिटी के बाद अब नीमकाथाना से जिले का दर्जा खत्म करने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है।

पूर्व कांग्रेस विधायक रमेश चंद्र खंडेलवाल ने शनिवार को राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। उन्होंने सरकार के 29 दिसंबर 2024 को जारी अधिसूचना को चुनौती देते हुए इसे राजनीतिक और अवैध बताया है। याचिका में कहा गया है कि वर्षों की मांग के बाद मिले जिला दर्जे को बिना उचित कारण खत्म कर दिया गया।
खंडेलवाल ने अपनी याचिका में कहा कि नीमकाथाना को जिला बनाने की मांग तीन दशकों से की जा रही थी। सरकार ने रामलुभाया कमेटी की सिफारिशों और मापदंडों के आधार पर इसे जिला घोषित किया था। इसके बाद जिले में सरकारी कार्यालय, बस स्टैंड, और प्रशासनिक ढांचे के लिए जमीन आवंटित की गई थी।
खंडेलवाल के वकील निखिल सैनी ने दलील दी कि जिला बनने के बाद कानून-व्यवस्था में सुधार हुआ और अपराध दर में कमी आई। जिला कलेक्टर और प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्ति के कारण क्षेत्र में बेहतर प्रशासनिक नियंत्रण स्थापित हुआ। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राजनीतिक कारणों से कुछ जिलों को बरकरार रखा गया, जबकि नीमकाथाना जैसे जिले का दर्जा समाप्त कर दिया गया।
राजस्थान सरकार ने हाल ही में 9 जिलों और 3 संभागों को खत्म करने का फैसला किया, जिससे राजनीतिक और सामाजिक संगठनों में रोष व्याप्त है। नीमकाथाना और गंगापुरसिटी जैसे जिलों का दर्जा खत्म करना इन विवादों के केंद्र में है।
नीमकाथाना से पहले गंगापुरसिटी का मामला भी हाईकोर्ट पहुंच चुका है। इन मामलों से साफ है कि भजनलाल सरकार का यह फैसला व्यापक विरोध झेल रहा है।
राजस्थान में प्रशासनिक पुनर्गठन के इस फैसले ने बड़े विवाद को जन्म दिया है। हाईकोर्ट में याचिकाएं और बढ़ने की संभावना है, जिससे सरकार के फैसले की वैधता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। अब देखना यह होगा कि न्यायालय इस मामले में क्या निर्णय लेता है।


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