Saturday, 29 August 2026

18 वें जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के कला सत्र: कला, संस्कृति और नवाचार का भव्य संगम


18 वें जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के कला सत्र: कला, संस्कृति और नवाचार का भव्य संगम

दुनिया के सबसे बड़े साहित्यिक उत्सव, जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2025, का आयोजन 30 जनवरी से 3 फरवरी तक जयपुर के होटल क्लार्क्स आमेर में होगा। इस वर्ष के फेस्टिवल में कला और संस्कृति पर विशेष सत्रों का आयोजन होगा, जिसमें कला, नवाचार और सांस्कृतिक समावेशन पर गहन चर्चा की जाएगी।

कला-सत्रों की मुख्य झलकियां: कला का अर्थशास्त्र:सत्र में चर्चा का विषय: नीति, नवाचार और समावेशन।

प्रतिभागी: संयुक्त अरब अमीरात की राज्य मंत्री नूरा बिन्त मोहम्मद अल काबी, ब्रिटिश काउंसिल के सीईओ स्कॉट मैक्डोनाल्ड,ह्यूस्टन ललित कला संग्रहालय के निदेशक गैरी टिनटेरो और मेट्रोपॉलिटन म्यूजियम ऑफ आर्ट के सीईओ मैक्स हॉलेइन, ।

सूत्रधार: टीमवर्क आर्ट्स के प्रबंध निदेशक संजॉय के. रॉय।

अजंता की गुफाएं: प्राचीन बौद्ध चित्रकला: कला इतिहासकार बेनॉय के. बहल और फेस्टिवल के सह-निदेशक विलियम डैलरिम्पल अजंता की गुफाओं के भित्तिचित्रों के वैश्विक प्रभाव और ऐतिहासिक महत्व पर चर्चा करेंगे।

डच कला का आकर्षण: पुलित्जर पुरस्कार विजेता लेखक बेंजामिन मोजर डच कला और संस्कृति पर दो सत्रों में बात करेंगे।

सत्र:द अपसाइड-डाउन वर्ल्ड: मीटिंग विद द डच मास्टर्स, इट्स डच टू मी, जिसमें कादर अब्दुल्ला भी शामिल होंगे।

किताबों का लोकार्पण: देवी एंड हर अवताराज:लेखिका मालाश्री लाल पौराणिक कथाओं और कला में स्त्री शक्ति पर बात करेंगी।

द थर्ड आई ऑफ इंडियन आर्ट: लेखक हर्षा दहेजिया भारतीय कला के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक आयामों पर चर्चा करेंगे।

ओजस आर्ट अवार्ड:गोंड कलाकार राम सिंह उर्वेती की विशेष पेंटिंग का प्रदर्शन।

विजेताओं: लघु कला के कलाकार विनीता शर्मा और अजय शर्मा।

पुस्तकों की चर्चा: हाइम्स ऑफ मेधिनी (अभिषेक सिंह), अनॉदर मास्टर: राम सिंह उर्वेती

विशेष प्रदर्शन:वीर मुंशी द्वारा पेपर-माचे और कलमकारी से प्रेरित इंस्टालेशन।

फोटोग्राफर विक्की रॉय की श्रृंखला एबिलिटी इन डिसबिलिटी।राजस्थान के छात्रों और कला समूहों की नवीन कलाकृतियों का प्रदर्शन।

संजॉय के. रॉय:"जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल रचनात्मक अभिव्यक्ति का उत्सव है, जो कला, साहित्य और संस्कृति को एक मंच प्रदान करता है।"

अनुभव नाथ:"इस फेस्टिवल में स्वदेशी कला और कलाकारों को अंतरराष्ट्रीय मंच मिलता है। यह कला और नवाचार का जश्न है।"

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