



केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलात मंत्री किरण रिजिजू द्वारा ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर दिए गए बयान को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। उनके बयान, "जब मैं पीएम मोदी की चादर लेकर ख्वाजा साहब की दरगाह में आ गया हूं तो दरगाह में मंदिर होने का दावा करने वालों को जवाब मिल गया है", को न्यायपालिका का अपमान और संविधान के खिलाफ बताया गया है।
सनातन धर्म रक्षा संघ, अजयमेरु राजस्थान के अध्यक्ष और पूर्व न्यायाधीश अजय शर्मा ने इस बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे न्यायपालिका और भारतीय संविधान के विरुद्ध बताते हुए कहा कि यह बयान न्यायालय में लंबित मामले के कार्यक्षेत्र में हस्तक्षेप करता है।
सनातन धर्म रक्षा संघ, अजयमेरु राजस्थान के अध्यक्ष और पूर्व न्यायाधीश अजय शर्मा ने कहा कि जब न्यायालय में सिविल वाद लंबित है और मंत्री पक्षकार के रूप में जुड़े हुए हैं, तो उनका ऐसा बयान देना संविधान और न्यायपालिका के कार्य क्षेत्र का उल्लंघन है। यह बयान न्यायालय की अवमानना की श्रेणी में आता है।
न्यायालय में मामला लंबित होने के बावजूद चादर भेजने की क्या आवश्यकता थी ?
मंत्री का बयान प्रधानमंत्री के प्रतिनिधि के रूप में दिया गया या व्यक्तिगत राय के रूप में ?
संघ का कहना है कि यह बयान लोकतंत्र और न्यायपालिका पर हमला है। अजय शर्मा ने इसे "बचकाना स्टेटमेंट" करार देते हुए कहा कि इस तरह का बयान भारत के संवैधानिक ढांचे को कमजोर करता है।