



कोटपूतली: राजस्थान के कोटपूतली में 700 फीट गहरे बोरवेल में फंसी तीन वर्षीय चेतना को 9 दिन बाद भी बाहर नहीं निकाला जा सका। प्रशासन और एनडीआरएफ ने दावा किया था कि सोमवार तक चेतना को रेस्क्यू कर लिया जाएगा, लेकिन देर रात तक टनल खोदने और अलाइनमेंट जांच का काम ही जारी रहा।
रेस्क्यू ऑपरेशन में चुनौतियां:रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान जवानों को सांस लेने में भी परेशानी हो रही है। सोमवार देर शाम एसडीआरएफ कमांडेंट राजीव सिसोदिया रेस्पिरेशन जांच के लिए नीचे उतरे। इस प्रक्रिया से किसी जीवित व्यक्ति की सांसों या उससे निकलने वाली कार्बन गैस का पता लगाया जाता है। हालांकि, चेतना की स्थिति को लेकर अब भी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है।
परिजनों और ग्रामीणों की नाराजगी:रेस्क्यू ऑपरेशन में हो रही देरी के चलते चेतना के परिजनों और स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि अगर समय पर उचित कदम उठाए जाते तो चेतना को पहले ही बाहर निकाला जा सकता था।
प्रशासन का बयान:जिला कलेक्टर कल्पना अग्रवाल ने सोमवार शाम चेतना के परिजनों से मुलाकात की और उन्हें ऑपरेशन में आ रही दिक्कतों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह ऑपरेशन बेहद पेचीदा है और हर स्तर पर एक्सपर्ट की मदद ली जा रही है। लेकिन तकनीकी और भौगोलिक बाधाओं के कारण समय लग रहा है।
रेस्क्यू ऑपरेशन के प्रयास:टनल खोदने और अलाइनमेंट जांच का काम जारी।विशेषज्ञों और आधुनिक तकनीकों का सहारा। जवानों की सुरक्षा और ऑक्सीजन सप्लाई सुनिश्चित की जा रही है।
परिवार का दर्द: चेतना के परिवार ने बताया कि वे पिछले 9 दिनों से उम्मीद में हैं कि उनकी बेटी सुरक्षित बाहर आ जाएगी। हालांकि, प्रशासन की ओर से हो रही देरी ने उनकी चिंता और निराशा बढ़ा दी है।