Saturday, 29 August 2026

अजमेर दरगाह पर प्रधानमंत्री को चादर नहीं भेजने का आग्रह: न्याय प्रक्रिया बाधित होने की चिंता


अजमेर दरगाह पर प्रधानमंत्री को चादर नहीं भेजने का आग्रह: न्याय प्रक्रिया बाधित होने की चिंता

सनातन धर्म रक्षा संघ, अजमेर, राजस्थान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस वर्ष अजमेर दरगाह पर चादर नहीं भेजने का आग्रह किया है। संघ का तर्क है कि संकट मोचन महादेव मंदिर विवाद न्यायालय में लंबित है, और ऐसे में चादर भेजने से यह संदेश जा सकता है कि प्रधानमंत्री विवादित स्थल की पुष्टि कर रहे हैं। इससे न्याय प्रक्रिया बाधित होने की संभावना हो सकती है।

संघ का तर्क:न्याय प्रक्रिया पर प्रभाव:पत्र में कहा गया कि जब मामला अदालत में विचाराधीन हो और केंद्र सरकार पक्षकार हो, तो प्रधानमंत्री को किसी ऐसे कार्य से बचना चाहिए जिससे न्याय प्रक्रिया प्रभावित हो। चादर भेजने से यह संकेत मिल सकता है कि केंद्र सरकार विवादित स्थल को समर्थन दे रही है।

राष्ट्रहित और जनहित का हवाला:संघ का मानना है कि चादर नहीं भेजना सभी वर्गों और शासन तंत्र के लिए हितकारी होगा।

सुरक्षा और रोहिंग्या मुद्दा:वादियों और अधिवक्ताओं की सुरक्षा:संघ ने वादी विष्णु गुप्ता को सुरक्षा प्रदान करने के साथ उनके अधिवक्ता विजय शर्मा, योगेंद्र ओझा, पूजा ओझा और संघ के पदाधिकारी अजय शर्मा (पूर्व न्यायाधीश) और संयोजक तरुण वर्मा को भी सुरक्षा देने की मांग की है।

रोहिंग्या मुद्दा:दरगाह क्षेत्र में बसे बांग्लादेशी रोहिंग्या नागरिकों को चिन्हित कर उनके खिलाफ कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया है।

अजमेर का सांप्रदायिक सौहार्द:पत्र में कहा गया कि कुछ व्यक्तियों द्वारा सांप्रदायिक माहौल खराब करने वाली बयानबाजी की गई है। ऐसे लोगों पर मुकदमा दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।इस वर्ष के उर्स में आने वाले लोगों और व्यवसायियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील भी की गई है।

संघ के हस्ताक्षरकर्ता: प्रधानमंत्री को भेजे गए पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले प्रमुख लोगों में अजय शर्मा (पूर्व न्यायाधीश), तरुण वर्मा, रवि मेहता, देवेंद्र त्रिपाठी, बृजेश गौड़, राम सिंह उदावत, पंडित चंद्रशेखर गौड़, अशोक शर्मा, महावीर कुमावत, इंद्र सिंह पंवार, और शशि कुमार महावर शामिल हैं।


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