



पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भजनलाल सरकार के जिलों और संभागों के पुनर्निर्धारण के फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। गहलोत ने कहा कि वर्तमान सरकार ने इस निर्णय को लेने में एक साल का समय लिया, जिससे उनकी सोच में कंफ्यूजन साफ झलकता है।
पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा, "हमने जब 3 नए संभाग बनाए थे, तो यह पूरी तरह से सोच-समझकर किया गया था। यह निर्णय प्रशासनिक और जनहित को ध्यान में रखकर लिया गया था। मुझे नहीं पता कि भजनलाल सरकार ने यह फैसला किस सोच के आधार पर लिया है।"
पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने भजनलाल सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिलों और संभागों का गठन कोई राजनीतिक निर्णय नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक आवश्यकताओं और जनता की भलाई के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने नए जिलों और संभागों का गठन पूरी गंभीरता से किया था।
भजनलाल सरकार ने हाल ही में गहलोत सरकार के कार्यकाल में बनाए गए 9 जिलों और 3 संभागों (पाली, सीकर, बांसवाड़ा) को समाप्त कर दिया है। इस फैसले को सरकार ने प्रशासनिक और वित्तीय दृष्टि से आवश्यक बताया, लेकिन विपक्ष इसे राजनीतिक कदम करार दे रहा है।
पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत का यह बयान आगामी चुनावों से पहले राजस्थान में राजनीतिक तापमान बढ़ा सकता है। कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर सरकार को घेरने की योजना बनाई है, जबकि भजनलाल सरकार इसे प्रदेश के प्रशासनिक सुधार का हिस्सा बता रही है।