Saturday, 29 August 2026

राजस्थान रोडवेज की 163 करोड़ की 510 नई BS-6 बसें बनीं यात्रियों के लिए असुविधा, सीटों के बीच स्पेस कम


राजस्थान रोडवेज की 163 करोड़ की 510 नई BS-6 बसें बनीं यात्रियों के लिए असुविधा, सीटों के बीच स्पेस कम

राजस्थान रोडवेज ने इस साल 163 करोड़ रुपये की लागत से 510 नई BS-6 श्रेणी की बसें खरीदी हैं। हालांकि, आधुनिक तकनीक से लैस और प्रदूषण कम करने वाली ये बसें यात्रियों के लिए सुविधा के बजाय असुविधा का कारण बन रही हैं। नई बसों में सीटों के बीच स्पेस कम होने के कारण यात्रियों को लंबी दूरी के सफर में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

सीटों के बीच स्पेस में कमी
जब BS-3, BS-4 और BS-6 श्रेणी की बसों के अंदर सीटों का माप लिया गया, तो पाया गया कि BS-6 बसों में सीटों के बीच का स्पेस केवल 60 से 62 सेमी है। यह BS-3 (65-66 सेमी) और BS-4 (64-65 सेमी) बसों की तुलना में 3 से 6 सेमी कम है।

ड्राइवर कैबिन की लंबाई बढ़ी
नई बसों में ड्राइवर कैबिन की लंबाई 20 सेमी बढ़ाकर 190 सेमी कर दी गई है, जबकि पुरानी बसों में यह 170 सेमी थी। इसके अलावा, इमरजेंसी एग्जिट सीट के पास अधिक स्पेस छोड़ा गया है। इन बदलावों के कारण अन्य सीटों के बीच का स्पेस घट गया है।

प्रदूषण में कमी, लेकिन सुविधा में कमी
नई BS-6 बसें पर्यावरण के अनुकूल हैं और इनसे प्रदूषण कम होता है। लेकिन यात्री सुविधा में आई कमी ने इन बसों के उपयोग को चुनौतीपूर्ण बना दिया है। रोडवेज प्रशासन ने अधिकांश बसें एनसीआर क्षेत्र में भेजी हैं, जहां लंबी दूरी के यात्री अधिक होते हैं।

यात्रियों की शिकायतें बढ़ीं
यात्रियों ने नई बसों में सीटिंग स्पेस कम होने की शिकायत की है। वे लंबे सफर के दौरान असुविधा महसूस कर रहे हैं। रोडवेज प्रशासन को इन शिकायतों पर ध्यान देकर समाधान निकालने की जरूरत है।

रोडवेज प्रशासन की प्रतिक्रिया
रोडवेज के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्वीकार किया कि सीटों के बीच का स्पेस कम हुआ है, लेकिन बसों में सीटों की संख्या 47 ही रखी गई है। ड्राइवर कैबिन और इमरजेंसी एग्जिट की जरूरतों के चलते यह बदलाव किया गया है।

क्या हो सकता है समाधान?
यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए बसों के अंदर सीटिंग अरेंजमेंट में बदलाव किया जा सकता है। इसके अलावा, रोडवेज प्रशासन को यात्रियों की शिकायतों पर जल्द प्रतिक्रिया देनी चाहिए।

नई BS-6 बसें प्रदूषण नियंत्रण के लिए एक सराहनीय कदम हैं, लेकिन यात्री सुविधाओं की अनदेखी इस पहल को कमजोर कर सकती है। रोडवेज प्रशासन को इन समस्याओं का समाधान जल्द से जल्द करना चाहिए।

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