



कोटपूतली के किरतपुरा गांव की बड़ियाली ढाणी में 3 साल की चेतना को बोरवेल से बाहर निकालने का ऑपरेशन ठप पड़ता दिख रहा है। चेतना सोमवार (23 दिसंबर) को 700 फीट गहरे बोरवेल में गिर गई थी और 150 फीट पर फंस गई थी। हालांकि, रेस्क्यू टीम ने देसी जुगाड़ से बच्ची को 30 फीट ऊपर लाने में सफलता हासिल की थी, लेकिन अब ऑपरेशन आगे नहीं बढ़ पा रहा है।
बार-बार बदली जा रही योजनाएं
प्रशासन ने दो दिन पहले बोरवेल के समानांतर 170 फीट गहरा गड्ढा खोदने का प्लान बनाया था, ताकि रैट माइनर्स सुरंग बनाकर चेतना तक पहुंच सकें। लेकिन लगातार बदलती योजनाओं और बारिश के कारण यह योजना भी अटक गई है।
परिजनों का आरोप: प्रशासन लापरवाह
चेतना के ताऊ शुभराम ने कहा कि प्रशासन से सवाल करने पर कोई जवाब नहीं मिलता। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारी अधिक पूछने पर कलेक्टर से संपर्क करने को कहते हैं, लेकिन कलेक्टर खुद अनुपलब्ध रहती हैं। चेतना की मां धोली देवी ने एक बार फिर प्रशासन से उनकी बेटी को बाहर निकालने की गुहार लगाई है।
चेतना का हाल: चार दिन से कोई मूवमेंट नहीं
रेस्क्यू टीम के अनुसार, चेतना करीब 114 घंटे से भूखी-प्यासी है। बीते चार दिनों से कोई मूवमेंट नहीं देखा गया है, जिससे परिवार की चिंता बढ़ गई है।
रेस्क्यू ऑपरेशन का धीमा प्रगति
रेस्क्यू ऑपरेशन के तहत बोरवेल के पास एक समानांतर गड्ढा खोदा गया था। इसके बाद 20 फीट की सुरंग खोदने की योजना बनाई गई थी, लेकिन बारिश और प्रशासनिक सुस्ती के कारण यह योजना अब तक क्रियान्वित नहीं हो सकी।
गांव और परिवार में निराशा
गांव के लोग और चेतना के परिजन प्रशासन की लापरवाही से नाराज हैं। गांववालों का कहना है कि हर दिन नई योजना बताई जाती है, लेकिन शाम तक कुछ भी ठोस नहीं होता।
सरकार और प्रशासन पर सवाल
यह घटना न केवल प्रशासनिक व्यवस्था की सुस्ती को उजागर करती है, बल्कि आपदा प्रबंधन और रेस्क्यू ऑपरेशन में प्रभावी योजना की कमी को भी दिखाती है।
चेतना का रेस्क्यू ऑपरेशन एक परीक्षा है कि क्या प्रशासन समय पर सही कदम उठाकर मासूम की जान बचा सकेगा। परिजनों और गांववालों की उम्मीदें अब भी प्रशासन के बेहतर प्रयास पर टिकी हैं।