Saturday, 29 August 2026

ग्राम विकास अधिकारी से 11.10 लाख की रिकवरी पर हाईकोर्ट की अंतरिम रोक


ग्राम विकास अधिकारी से 11.10 लाख की रिकवरी पर हाईकोर्ट की अंतरिम रोक

हाईकोर्ट ने ग्राम विकास अधिकारी सुरेश कुमार मीणा से 11.10 लाख रुपये की रिकवरी पर अंतरिम रोक लगा दी है। जस्टिस सुदेश बंसल की अदालत ने सुरेश कुमार की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।

अधिकारियों को नोटिस जारी: हाईकोर्ट ने इस मामले में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, जिला कलेक्टर, जिला परिषद जयपुर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, और पंचायत समिति पावटा के ग्राम विकास अधिकारी व ग्राम पंचायत पाथरेडी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

ग्राम सभा की स्वीकृति के बाद हुए कार्य: याचिकाकर्ता के अधिवक्ता प्रदीप कलवानियां ने कोर्ट को बताया कि जिन निर्माण कार्यों के लिए रिकवरी आदेश जारी किए गए हैं, वे सभी कार्य ग्राम सभा की स्वीकृति और उच्चाधिकारियों के अनुमोदन के बाद पूरे किए गए थे।

लोकायुक्त की जांच: शिकायतकर्ता, तत्कालीन उप सरपंच ने ही ग्राम सभा में इन कार्यों के अनुमोदन का प्रस्ताव रखा था। बाद में उन्हीं की शिकायत पर लोकायुक्त द्वारा निर्माण कार्यों की जांच करवाई गई।

रिकवरी आदेश: जांच के दौरान ग्राम विकास अधिकारी का पक्ष सुने बिना ही उनके खिलाफ 11.10 लाख रुपये की रिकवरी का आदेश जारी कर दिया गया।

कोर्ट का निर्णय: हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया पाया कि याचिकाकर्ता का पक्ष सुने बिना रिकवरी आदेश जारी किया गया है। इस पर अदालत ने रिकवरी आदेश पर अंतरिम रोक लगाते हुए संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा।

क्या है मामला?: यह मामला ग्राम पंचायत पाथरेडी के निर्माण कार्यों से जुड़ा है। इन कार्यों को निजी खातेदारी की जमीन पर बताए जाने के आधार पर रिकवरी आदेश जारी किया गया था।

अगली सुनवाई में क्या होगा?: हाईकोर्ट ने सभी संबंधित अधिकारियों को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई में यह तय होगा कि ग्राम विकास अधिकारी से रिकवरी आदेश उचित है या नहीं।
यह मामला सरकारी अधिकारियों की जिम्मेदारियों और प्रक्रियाओं की पारदर्शिता पर प्रकाश डालता है। ऐसे मामलों में बिना पक्ष सुने कार्रवाई करने से अधिकारी असुरक्षित महसूस कर सकते हैं। इस प्रकार की घटनाएं प्रशासनिक सुधार की आवश्यकता को रेखांकित करती हैं।

अगली सुनवाई में अदालत का निर्णय इस प्रकरण में निष्पक्षता और न्याय सुनिश्चित करेगा।

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