



जल जीवन मिशन (जेजेएम) में बड़ा घोटाला सामने आया है, जहां बिना काम किए ही ठेकेदारों को 55 करोड़ रुपए का एडवांस पेमेंट कर दिया गया। जलदाय विभाग की जांच में यह खुलासा हुआ है। सरकार ने इस मामले की रिपोर्ट प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को सौंपी है, जिसमें 50 इंजीनियरों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। अब इन इंजीनियरों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
ईडी ने मांगी थी रिपोर्ट: ईडी ने 6 अक्टूबर को जल जीवन मिशन घोटाले की जांच रिपोर्ट मांगी थी। जांच में पाया गया कि मौके पर न तो मटेरियल पहुंचा और न ही काम हुआ, फिर भी जेईएन, एईएन और एक्सईएन ने पेमेंट जारी कर दिया। ईडी के सहायक निदेशक ने जलदाय विभाग के चीफ इंजीनियर दिनेश गोयल से सभी ठेकेदारों की एनआईटी, टेंडर राशि, पेमेंट और कार्य की जानकारी मांगी है।
पेमेंट की प्रक्रिया में लापरवाही: ठेकेदार फर्मों को तीन चरणों में पेमेंट किया जाता है:वर्कऑर्डर के बाद मटेरियल की माप पर 70% पेमेंट।लाइन बिछाने पर 20% पेमेंट।पाइपलाइन चालू होने पर 10% पेमेंट। जांच में पाया गया कि बिना मटेरियल और बिना काम के ही 70 से 90% तक का भुगतान कर दिया गया।
जिलों में एडवांस पेमेंट का विवरण:
जांच के दायरे में इंजीनियर: जयपुर रीजन-प्रथम, जयपुर रीजन-द्वितीय, अलवर और अजमेर के इंजीनियरों पर संदेह है। ईडी और सीबीआई इनकी भूमिका की गहन जांच कर रही है।
मनी लॉन्ड्रिंग की आशंका: 900 करोड़ के इस घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग की आशंका जताई गई है। घोटाले का पैसा विवादित जमीनों और बेनामी संपत्तियों में लगाया गया है। कई भू-कारोबारियों पर ईडी की नजर है और कुछ स्थानों पर छापेमारी भी हो चुकी है।