



नए साल की शुरुआत के साथ ही राजस्थान के 300 कॉलेजों में पढ़ाई पर गंभीर संकट गहराने वाला है। राजसेस सोसायटी के अधीन संचालित कॉलेजों में विद्या संबल योजना के तहत लगे 2000 से अधिक अस्थायी शिक्षकों का कार्यकाल जनवरी के पहले सप्ताह में समाप्त हो रहा है। इन शिक्षकों के हटने से प्रथम और तृतीय सेमेस्टर में पढ़ाई कर रहे छात्रों की शिक्षा प्रभावित होगी।
विद्या संबल योजना में बदलाव: विद्या संबल योजना को कांग्रेस सरकार ने लागू किया था, लेकिन भाजपा सरकार ने इसके प्रावधानों में बदलाव कर दिए। अब शिक्षकों को प्रत्येक वर्ष के दूसरे और चौथे सेमेस्टर के बाद पुनः आवेदन करना होगा। सेमेस्टर सिस्टम के तहत शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। इस नई प्रक्रिया में देरी होने पर छात्रों की पढ़ाई बाधित हो सकती है।
अस्थायी शिक्षकों की समस्याएं:भुगतान में देरी: अस्थायी शिक्षकों ने शिकायत की है कि सरकार समय पर भुगतान नहीं कर रही है, जिससे वे आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं।
अनुभव प्रमाण पत्र नहीं: इन शिक्षकों को कॉलेज में पढ़ाने का अनुभव प्रमाण पत्र भी नहीं दिया जा रहा है।
कालांश के आधार पर भुगतान: शिक्षकों को प्रति 50 कालांश के आधार पर भुगतान किया जा रहा है, जो उनकी आर्थिक स्थिति को और कमजोर कर रहा है।
शिक्षकों का कार्यकाल समाप्त:कॉलेज आयुक्तालय के आदेशानुसार अस्थायी शिक्षकों का कार्यकाल 24 सप्ताह या 28 फरवरी (जो पहले हो) तक ही मान्य है। जनवरी में 24 सप्ताह पूरे हो रहे हैं, जिससे करीब 2000 शिक्षकों को हटाया जाएगा।
छात्रों की पढ़ाई पर असर:शिक्षकों के हटने से 300 कॉलेजों में पढ़ाई रुकने की आशंका है। यह स्थिति न केवल छात्रों के शिक्षा स्तर को प्रभावित करेगी, बल्कि उनकी परीक्षाओं की तैयारी पर भी असर डालेगी।