Saturday, 29 August 2026

द्रव्यवती नदी प्रोजेक्ट: हाईकोर्ट ने रखरखाव की अनदेखी को बताया मौलिक अधिकारों का उल्लंघन, जेडीए और टाटा प्रोजेक्ट्स को रिपोर्ट पेश करने के निर्देश


द्रव्यवती नदी प्रोजेक्ट: हाईकोर्ट ने रखरखाव की अनदेखी को बताया मौलिक अधिकारों का उल्लंघन, जेडीए और टाटा प्रोजेक्ट्स को रिपोर्ट पेश करने के निर्देश

हाईकोर्ट ने द्रव्यवती नदी प्रोजेक्ट के रखरखाव और संचालन को लेकर सुनवाई करते हुए स्पष्ट टिप्पणी की कि स्वच्छ और प्रदूषण रहित वातावरण हर नागरिक का मौलिक अधिकार है। जस्टिस सुदेश बंसल ने मामले में स्वप्रेरित प्रसंज्ञान लेते हुए जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) और कंसोर्टियम ऑफ टाटा प्रोजेक्ट्स को निर्देश दिया कि वे प्रोजेक्ट के रखरखाव की वार्षिक रिपोर्ट पेश करें।

हाईकोर्ट की टिप्पणी: हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार का यह संवैधानिक कर्तव्य है कि वह नागरिकों को प्रदूषण रहित वातावरण प्रदान करे। द्रव्यवती नदी प्रोजेक्ट के अनुचित संचालन से आमजन के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होगा और उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

रखरखाव में लापरवाही के परिणाम: कोर्ट ने कहा कि दस्तावेजों से यह स्पष्ट होता है कि प्रोजेक्ट के अनुबंध के समाप्त होने के बाद एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) का संचालन प्रभावी तरीके से नहीं हुआ, जिससे नदी के आसपास के क्षेत्रों में बदबू और प्रदूषण बढ़ गया। लोगों का ताजा सांस लेना भी मुश्किल हो गया था।

अनुबंध और विवाद: जेडीए और टाटा प्रोजेक्ट्स के बीच 206.08 करोड़ रुपये का अनुबंध हुआ था।अनुबंध समाप्त होने और रखरखाव में लापरवाही के कारण विवाद उत्पन्न हुआ।कंपनी के पक्ष में 52 करोड़ रुपये का अवार्ड पारित हुआ, जिसे जेडीए ने चुनौती दी।

कॉमर्शियल कोर्ट का आदेश:कोर्ट ने जेडीए को 26 करोड़ रुपये नकद जमा कराने का निर्देश दिया था।हाईकोर्ट ने इस आदेश को संशोधित करते हुए जेडीए को निर्देश दिया कि अवार्ड की 50% राशि (26 करोड़ रुपये) राष्ट्रीयकृत बैंक में एफडीआर के रूप में जमा कराई जाए।

हाईकोर्ट के निर्देश: द्रव्यवती प्रोजेक्ट का रखरखाव प्रभावी तरीके से जारी रहे।जेडीए और टाटा प्रोजेक्ट्स प्रोजेक्ट की वार्षिक रिपोर्ट पेश करें।अनुबंध और विवाद से संबंधित दस्तावेज़ सार्वजनिक हित को ध्यान में रखकर जांचे जाएं।

नागरिकों के हित में फैसला:हाईकोर्ट ने कहा कि द्रव्यवती नदी प्रोजेक्ट सीधे तौर पर जनता के स्वास्थ्य और पर्यावरण से जुड़ा है। इसे सुचारू रूप से संचालित करना राज्य सरकार और संबंधित पक्षकारों का दायित्व है।

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