



राज्य सरकार ने पहली बार जनप्रतिनिधियों को प्रशासक नियुक्त करने की तैयारी की है। प्रदेश की 6759 ग्राम पंचायतों का कार्यकाल जनवरी 2025 में पूरा होने जा रहा है, जबकि 704 ग्राम पंचायतों का कार्यकाल मार्च 2025 में समाप्त होगा। वन स्टेट वन इलेक्शन के मॉडल को अपनाते हुए भजनलाल सरकार ने एमपी, झारखंड और उत्तराखंड के फॉर्मूले का अध्ययन शुरू किया है ताकि सभी पंचायतों के चुनाव एक साथ कराए जा सकें।
राजस्थान सरपंच संघ के पदाधिकारी रफीक पठान ने कहा कि पंचायती राज एक्ट 95 के तहत राज्यों को कुछ परिस्थितियों में सरपंच, प्रधान और जिला प्रमुखों का कार्यकाल बढ़ाने का अधिकार है। उन्होंने बताया कि तीन राज्यों (एमपी, झारखंड, उत्तराखंड) का उदाहरण राज्य सरकार को पहले ही सौंप दिया गया है। उनका मानना है कि इस कदम से विकास की रफ्तार बनी रहेगी और 2800 करोड़ रुपए के लंबित फंड का उपयोग किया जा सकेगा।
प्रदेश सरकार वन स्टेट वन इलेक्शन की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। यदि जनप्रतिनिधियों को प्रशासक के रूप में नियुक्त किया जाता है, तो इससे ग्रामीण विकास योजनाओं की निरंतरता बनी रहेगी। हालांकि, परिसीमन और चुनाव प्रक्रिया को लेकर अभी कई चुनौतियां सामने हैं, जिनका समाधान सरकार को जल्द निकालना होगा।