Saturday, 29 August 2026

प्रदेश में ग्राम पंचायतों में प्रशासक नियुक्ति की तैयारी: वन स्टेट वन इलेक्शन की ओर भजनलाल सरकार का कदम


प्रदेश में ग्राम पंचायतों में प्रशासक नियुक्ति की तैयारी: वन स्टेट वन इलेक्शन की ओर भजनलाल सरकार का कदम

राज्य सरकार ने पहली बार जनप्रतिनिधियों को प्रशासक नियुक्त करने की तैयारी की है। प्रदेश की 6759 ग्राम पंचायतों का कार्यकाल जनवरी 2025 में पूरा होने जा रहा है, जबकि 704 ग्राम पंचायतों का कार्यकाल मार्च 2025 में समाप्त होगा। वन स्टेट वन इलेक्शन के मॉडल को अपनाते हुए भजनलाल सरकार ने एमपी, झारखंड और उत्तराखंड के फॉर्मूले का अध्ययन शुरू किया है ताकि सभी पंचायतों के चुनाव एक साथ कराए जा सकें।

प्रशासक की नियुक्ति क्यों जरूरी?: मतदाता सूचियां तैयार करने और चुनाव कार्यक्रम घोषित करने में तीन माह का समय लगता है। जनवरी में कार्यकाल समाप्त होने वाली ग्राम पंचायतों के चुनाव अब संभव नहीं दिख रहे, ऐसे में प्रशासक नियुक्त करना सरकार का अंतिम विकल्प है।

अन्य राज्यों का मॉडल:मध्यप्रदेश, झारखंड और उत्तराखंड में पूर्व जनप्रतिनिधियों (सरपंचों) को प्रशासक बनाया गया था। उनके पास वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार रहते हैं, जिससे जनता की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विकास कार्य सुचारु रूप से जारी रखा जाता है।

परिसीमन एक बड़ी चुनौती:चुनाव से पहले परिसीमन की चुनौती भी सरकार के सामने है। नए जिलों के परिसीमन को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायती राज विभाग को चार रिमाइंडर भेजे हैं, लेकिन अभी तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला है। दूसरी ओर, पिछली सरकार में बनाए गए नए जिलों को खत्म करने पर सरकार का निर्णय बाकी है।

राजस्थान सरपंच संघ के पदाधिकारी रफीक पठान ने कहा कि पंचायती राज एक्ट 95 के तहत राज्यों को कुछ परिस्थितियों में सरपंच, प्रधान और जिला प्रमुखों का कार्यकाल बढ़ाने का अधिकार है। उन्होंने बताया कि तीन राज्यों (एमपी, झारखंड, उत्तराखंड) का उदाहरण राज्य सरकार को पहले ही सौंप दिया गया है। उनका मानना है कि इस कदम से विकास की रफ्तार बनी रहेगी और 2800 करोड़ रुपए के लंबित फंड का उपयोग किया जा सकेगा।

प्रदेश सरकार वन स्टेट वन इलेक्शन की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। यदि जनप्रतिनिधियों को प्रशासक के रूप में नियुक्त किया जाता है, तो इससे ग्रामीण विकास योजनाओं की निरंतरता बनी रहेगी। हालांकि, परिसीमन और चुनाव प्रक्रिया को लेकर अभी कई चुनौतियां सामने हैं, जिनका समाधान सरकार को जल्द निकालना होगा।

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