भाजपा नेता और धौलपुर के पूर्व विधायक गिर्राज सिंह मलिंगा को सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दे दी है। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस अरविंद कुमार की पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान ट्रायल कोर्ट को जमानत की शर्तें तय करने का निर्देश दिया।
गिर्राज सिंह मलिंगा पर अपने विधायक कार्यकाल के दौरान बिजली विभाग के एईएन और जेईएन पर हमला करने का गंभीर आरोप है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 8 नवंबर को सुनवाई के दौरान उन्हें 2 सप्ताह में सरेंडर करने का निर्देश दिया था। इसके तहत मलिंगा ने 20 नवंबर को धौलपुर के एससी-एसटी कोर्ट में आत्मसमर्पण किया।
राज्य सरकार ने किया जमानत का विरोध:
राज्य सरकार की ओर से पेश हुए अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा ने जमानत का विरोध करते हुए तर्क दिया कि मलिंगा पर गंभीर आरोप हैं और उनका अपराध साबित हो सकता है।
सुप्रीम कोर्ट का निर्देश:सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया है कि वह जमानत की शर्तें तय करे। कोर्ट ने कहा कि सरेंडर करने के 4 सप्ताह बाद मामले की सुनवाई शुरू की जाए।
मलिंगा के खिलाफ आरोप: मलिंगा पर आरोप है कि उन्होंने विधायक रहते हुए सरकारी अधिकारियों पर हमला किया। यह मामला बिजली विभाग के एईएन और जेईएन पर हमले से जुड़ा है।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश और भविष्य की प्रक्रिया: सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मलिंगा को दी गई जमानत केवल ट्रायल कोर्ट की शर्तों को मानने के बाद प्रभावी होगी। इस आदेश के बाद मामले की सुनवाई एससी-एसटी कोर्ट में आगे बढ़ेगी।