सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सरिस्का टाइगर रिजर्व और पांडुपोल हनुमान मंदिर से जुड़े सेंट्रल एंपावर्ड कमेटीकी 25 सिफारिशों को पूरी तरह लागू करने का निर्देश दिया। जस्टिस बी.आर. गवई और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने इन सिफारिशों पर निगरानी के लिए एक मॉनिटरिंग कमेटी बनाने का भी आदेश दिया है, जो समय-समय पर प्रगति की रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपेगी।
राजस्थान सरकार को एक साल में सिफारिशें लागू करने का आदेश: सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार को एक साल के भीतर सेंट्रल एंपावर्ड कमेटी की सभी सिफारिशों को लागू करने के निर्देश दिए।
सरिस्का टाइगर रिजर्व: बाघों के प्रजनन क्षेत्रों के वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर सरिस्का की सीमाओं को नए सिरे से निर्धारित किया जाएगा।अवैध खनन पर रोक के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे।विशेष टाइगर सुरक्षा बल (STPF) का गठन किया जाएगा।वन विभाग के सभी खाली पदों को दिसंबर 2025 तक भरा जाएगा।
पांडुपोल हनुमान मंदिर में निजी वाहनों पर प्रतिबंध: मंदिर क्षेत्र में अब केवल इलेक्ट्रिक वाहनों से तीर्थयात्रा की अनुमति होगी।निजी वाहनों का प्रवेश पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा।यह कदम मंदिर क्षेत्र को पर्यावरणीय दृष्टि से सुरक्षित रखने के लिए उठाया गया है।
राजस्थान सरकार का पक्ष: एएजी शिव मंगल शर्मा और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने सरकार की ओर से पैरवी की। सरकार ने सेंट्रल एंपावर्ड कमेटी की सिफारिशों पर सहमति व्यक्त की और कोर्ट को आश्वस्त किया कि सभी सिफारिशें तय समय में लागू की जाएंगी।
सिफारिशों की प्रमुख बातें: सरिस्का टाइगर रिजर्व की सीमाओं का बाघों के प्रजनन क्षेत्रों के आधार पर पुनर्निर्धारण।विशेष टाइगर सुरक्षा बल का गठन।
वन विभाग के रिक्त पदों को शीघ्र भरना।अवैध खनन पर सख्ती।पांडुपोल हनुमान मंदिर में तीर्थयात्रियों के लिए इलेक्ट्रिक बस सेवा।
मॉनिटरिंग कमेटी की भूमिका: मॉनिटरिंग कमेटी सेंट्रल एंपावर्ड कमेटी की सिफारिशों के क्रियान्वयन की निगरानी करेगी।यह समय-समय पर अपनी प्रगति रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपेगी।
सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश सरिस्का और पांडुपोल हनुमान मंदिर क्षेत्र के पर्यावरणीय संरक्षण और बाघों की सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम है। राजस्थान सरकार के लिए यह आदेश न केवल पर्यावरण सुरक्षा बल्कि धार्मिक और पर्यटन स्थलों को संरक्षित करने की जिम्मेदारी भी सुनिश्चित करता है।