



करीब 11 साल पुराने एकल पट्टा प्रकरण में राजस्थान हाईकोर्ट ने सुनवाई फिर से शुरू कर दी है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद मुख्य न्यायाधीश एमएम श्रीवास्तव की एकलपीठ ने गुरुवार को मामले की सुनवाई की। इस प्रकरण में कांग्रेस विधायक शांति धारीवाल और यूडीएच विभाग के तीन पूर्व अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं।
कोर्ट ने हाईकोर्ट को छह महीने के भीतर फैसला देने का आदेश दिया।सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मुख्य न्यायाधीश स्वयं मामले की सुनवाई करें।
2013: परिवादी रामशरण सिंह ने एसीबी में शिकायत की, जिसके बाद तत्कालीन एसीएस जीएस संधू, डिप्टी सचिव निष्काम दिवाकर, और जोन उपायुक्त ओंकारमल सैनी सहित अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी हुई।
2014: तत्कालीन वसुंधरा सरकार के कार्यकाल में एसीबी ने मामला दर्ज किया।
भजनलाल सरकार: पहले क्लीन चिट का समर्थन किया। बाद में सुप्रीम कोर्ट में नया एफिडेविट दाखिल कर मामला बनता है का पक्ष लिया।
राजनीतिक दृष्टिकोण: प्रकरण में शांति धारीवाल जैसे वरिष्ठ नेताओं का नाम होना इसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील बनाता है।
एकल पट्टा प्रकरण में राजस्थान हाईकोर्ट की सुनवाई अब तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद मामले में सभी पक्षों से दस्तावेज पेश करने और जनवरी के अंत तक फाइनल सुनवाई करने के आदेश दिए गए हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि हाईकोर्ट इस मामले में क्या निर्णय लेता है और यह फैसला भ्रष्टाचार के मामलों में न्यायिक प्रक्रियाओं के लिए किस तरह का उदाहरण प्रस्तुत करता है।