Saturday, 29 August 2026

नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली का आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत पर तीखा पलटवार: तीन संतान के सुझाव को बताया "बेतुका"


 नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली का आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत पर तीखा पलटवार: तीन संतान के सुझाव को बताया "बेतुका"

नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के तीन संतान पैदा करने के सुझाव को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे बेतुका और महिलाओं पर दबाव डालने वाला बताया। जूली ने कहा कि यह बयान देश में आर्थिक और सामाजिक असंतुलन को बढ़ाने वाला है और इससे नई समस्याओं का जन्म होगा। उन्होंने राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से इस मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।

भागवत के बयान पर जूली का सवाल: नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि मोहन भागवत का यह कहना कि जनसंख्या दर कम होने से समाज नष्ट हो जाएगा, पूरी तरह विसंगति से भरा हुआ है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या आरएसएस प्रमुख महिलाओं को तीन संतान पैदा करने के लिए बाध्य करना चाहते हैं, जबकि देश में लाखों महिलाएं गरीबी, कुपोषण और शारीरिक कमजोरी का सामना कर रही हैं। उन्होंने दलित, आदिवासी और पिछड़े वर्ग की महिलाओं और बच्चों में कुपोषण की गंभीर समस्या का भी जिक्र किया।

आरएसएस की प्राथमिकता पर सवाल: नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने आरएसएस पर कट्टरवादी एजेंडा चलाने का आरोप लगाया और कहा कि संगठन देश में बढ़ती बेरोजगारी, गरीबी, महंगाई, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी जैसे गंभीर मुद्दों को लेकर अनजान है। उन्होंने कहा कि आरएसएस का ध्यान केवल जनसंख्या वृद्धि पर है, लेकिन प्राकृतिक संसाधनों की कमी और पर्यावरणीय संकट पर कोई चर्चा नहीं हो रही।

चीन से तुलना: नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने बताया कि भारत की आबादी अब चीन से अधिक हो चुकी है। संयुक्त राष्ट्र की 2023 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत की जनसंख्या 142 करोड़ 86 लाख हो गई है, जो चीन से 29 लाख अधिक है। उन्होंने कहा कि चीन ने आबादी पर नियंत्रण करके महाशक्ति बनने का रास्ता चुना है, जबकि आरएसएस का जनसंख्या बढ़ाने का सुझाव देश को पीछे ले जाएगा।

आरएसएस की चुप्पी पर सवाल: नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने आरोप लगाया कि आरएसएस सामाजिक सद्भाव और अमन-चैन खत्म करने वाली घटनाओं पर मौन है। उन्होंने कहा कि संगठन का ध्यान बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, कृषि संकट, पलायन और वायु प्रदूषण जैसे वास्तविक मुद्दों की बजाय अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने में है।

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