



कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भाजपा के धर्मांतरण बिल, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बयान और नगर निकायों में प्रशासकों की नियुक्ति के मुद्दे पर भाजपा सरकार पर तीखा हमला किया। उन्होंने भाजपा पर धर्मांतरण बिल के जरिए हिंदू-मुस्लिम राजनीति करने का आरोप लगाते हुए इसे जनता को भटकाने का प्रयास बताया।
डोटासरा ने कहा कि भाजपा सरकार पहले भी इस तरह के बिल लाई थी, लेकिन वह सफल नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि संविधान और पहले से बने कानून पर्याप्त हैं और इस नए कानून की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा, "यह बिल जनहित के मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने और राजनीतिक लाभ के लिए लाया गया है। जब वसुंधरा राजे मुख्यमंत्री थीं, तब भी ऐसा ही कानून लाया गया था, लेकिन उसे कोई समर्थन नहीं मिला। भाजपा बार-बार ऐसे मुद्दों को उठाकर अपनी राजनीतिक रोटियां सेक रही है।"
डोटासरा ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बयान का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने तीन बच्चों की बात की थी। डोटासरा ने इसे "अराजकता और नफरत फैलाने वाला बयान" बताते हुए कहा, "देश में हर धर्म का सम्मान होना चाहिए। भाजपा और आरएसएस मिलकर समाज में सांप्रदायिक विभाजन पैदा कर रहे हैं।"
उन्होंने कहा, "आरएसएस के कंधों पर चढ़कर सत्ता में आई भाजपा अब उनके विचारों का भी पालन नहीं कर रही। यह दिखाता है कि भाजपा के भीतर कितनी वैचारिक गड़बड़ी है।"
डोटासरा ने नगर निकायों और पंचायती राज चुनावों में प्रशासक नियुक्त करने के मुद्दे पर भाजपा सरकार की आलोचना करते हुए इसे लोकतंत्र और प्रजातंत्र के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा, "भाजपा सरकार जनप्रतिनिधियों के अधिकारों को खत्म कर, ब्यूरोक्रेसी से सरकार चलाने का प्रयास कर रही है। गुजरात मॉडल लागू करने की यह कोशिश राजस्थान में सफल नहीं होगी।"
डोटासरा ने कहा कि निकायों के चुनावों की प्रक्रिया में देरी जनता के साथ धोखा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर चुनाव प्रक्रिया में देरी कर रही है ताकि प्रशासक नियुक्त कर अपनी मर्जी से निर्णय ले सके। "यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक है और कांग्रेस इसका पुरजोर विरोध करेगी।"
डोटासरा ने भाजपा में अंदरूनी कलह की ओर इशारा करते हुए कहा, "मंत्री किरोड़ी लाल मीणा अपने भाई की हार से नाराज हैं और अपने ही नेताओं पर सवाल उठा रहे हैं। भाजपा सरकार, पार्टी और संगठन के भीतर सब कुछ सही नहीं चल रहा है। मंत्रियों और विधायकों के बीच आपसी टकराव ने सरकार की कार्यक्षमता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।"
डोटासरा ने उपचुनावों के बाद कांग्रेस संगठन में बड़े बदलाव के संकेत देते हुए कहा कि मंडल, ब्लॉक, प्रकोष्ठ और बूथ स्तर पर खाली पदों को जल्द भरा जाएगा। निष्क्रिय पदाधिकारियों को हटाकर नए और सक्रिय कार्यकर्ताओं को मौका दिया जाएगा।
डोटासरा ने कहा कि भाजपा सरकार प्रदेश में जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा कर प्रशासनिक नियंत्रण को प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा, "राजस्थान में सरकार चलाने में मंत्रियों और विधायकों की कोई भूमिका नहीं है। भाजपा सरकार को जनता के प्रति जवाबदेह होना पड़ेगा।"