



अजमेर दरगाह के दीवान जैनुअल आबेदीन ने धार्मिक स्थल विवादों पर सरकार के स्टैंड को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि सरकार का रुख पहले से ही स्पष्ट है, और अब इसमें बदलाव करना उसकी साख पर सवाल खड़ा करेगा।
दरगाह दीवान ने कहा कि 15 अगस्त 1947 को भारत में जितने भी धार्मिक स्थल थे, उन्हें उसी स्थिति में रखने का निर्देश दिया गया था। सरकार का रुख द प्लेस ऑफ वरशिप 1991 एक्ट के तहत स्पष्ट है। इसे अब खिलौना बनाकर छेड़छाड़ करना अनुचित है। उन्होंने कहा कि सरकार अब अपनी पहले से तय नीतियों के खिलाफ जाकर फैसले नहीं ले सकती। इससे केवल भ्रम और विवाद पैदा होगा।
अजमेर दरगाह के दीवान जैनुअल आबेदीन ने कहा कि हैरानी की बात है कि इस मामले में हमें ही पार्टी नहीं बनाया गया। इससे केवल भ्रम फैलाने और धार्मिक सौहार्द को बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है।”
अजमेर दरगाह के दीवान जैनुअल आबेदीन ने स्पष्ट किया कि प्लेस ऑफ वरशिप एक्ट 1991 का पालन करना न केवल कानूनी बाध्यता है, बल्कि यह देश की सांस्कृतिक और धार्मिक विविधता के प्रति सम्मान दिखाने का भी माध्यम है।उन्होंने कहा कि मूल उद्देश्य यही था कि धार्मिक स्थलों पर कोई नया विवाद खड़ा न हो। लेकिन आज इस एक्ट को एक खिलौने की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग भ्रम पैदा कर रहे हैं। दरगाह दीवान ने कहा कि अजमेर दरगाह जैसे पवित्र स्थलों को विवाद में घसीटने का प्रयास दुर्भाग्यपूर्ण है।
अजमेर दरगाह के दीवान जैनुअल आबेदीन ने कहा कि कुछ लोग अपनी राजनीतिक या व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं के लिए धार्मिक स्थलों को मुद्दा बना रहे हैं। यह न केवल समाज में विभाजन पैदा करेगा, बल्कि हमारी साझा विरासत को भी नुकसान पहुंचाएगा।”